अमेठी की 4 सीटों पर 2027 का सियासी गणित, 2022 से अब तक क्या बदला?

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अमेठी सिर्फ एक जिला भर नहीं, बल्कि दशकों से राष्ट्रीय सियासत का बड़ा केंद्र रहा है। कांग्रेस के लंबे असर, गांधी परिवार के चुनावी इतिहास और बीते सालों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उभार ने इस क्षेत्र को हमेशा सुर्खियों में रखा है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच अमेठी की चारों विधानसभा सीटें—178 तिलोई, 184 जगदीशपुर (SC), 185 गौरीगंज और 186 अमेठी—एक बार फिर राजनीतिक दलों की रणनीति के केंद्र में हैं।

वर्तमान में जिले का सियासी गणित बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां की चार सीटों में से दो पर भाजपा (तिलोई और जगदीशपुर) और दो पर समाजवादी पार्टी (गौरीगंज और अमेठी) का कब्जा रहा।

2010 में बना यूपी का 72वां जिला: आबादी और धार्मिक ताना-बाना

अमेठी उत्तर प्रदेश का 72वां जिला है, जिसका गठन 1 जुलाई 2010 को हुआ था। इसमें तत्कालीन सुल्तानपुर जिले की तीन तहसीलों (अमेठी, गौरीगंज, मुसाफिरखाना) और रायबरेली जिले की तिलोई तहसील को जोड़कर नया स्वरूप दिया गया था।

चूंकि 2011 की जनगणना के समय अमेठी अलग जिला नहीं था, इसलिए इसकी जनसांख्यिकी को समझने के लिए तत्कालीन तहसीलों के आंकड़ों को आधार बनाया जाता है:

  • कुल आबादी और लिंगानुपात: 2011 Census के तहत इन चार तहसीलों की कुल आबादी 20,50,133 बैठती है (पुरुष: 10,37,293 और महिला: 10,12,840)। इस हिसाब से लिंगानुपात लगभग 976 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष है। हालांकि, जिला प्रशासन के मौजूदा आधिकारिक पोर्टल पर 2011 जनगणना के तहत कुल आबादी 18,67,678 (पुरुष 9,45,235 व महिला 9,22,443) दर्ज है।

  • साक्षरता दर: जिले की कुल साक्षरता दर लगभग 59.14 प्रतिशत दर्ज है। तहसीलों के स्तर पर महिला और पुरुष साक्षरता में बड़ा अंतर दिखता है। अमेठी तहसील में पुरुष साक्षरता 71.83% और महिला साक्षरता 52.70% रही, जबकि मुसाफिरखाना में पुरुष साक्षरता 61.59% और महिला साक्षरता महज 43.71% दर्ज की गई।

  • धार्मिक समीकरण: चार तहसीलों के आंकड़ों के संकलन के अनुसार, क्षेत्र में हिंदू आबादी लगभग 79.26 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 20.06 प्रतिशत है। अन्य धार्मिक समुदायों और धर्म स्पष्ट न करने वालों की हिस्सेदारी 0.68 प्रतिशत के आसपास है।

तिलोई और जगदीशपुर: जहां BJP ने कायम रखा दबदबा

जिले की पहली सीट 178-तिलोई सामान्य वर्ग की सीट है। 2022 के चुनाव में भाजपा के मयंकेश्वर शरण सिंह ने 99,472 वोट (48.54%) पाकर सपा के मोहम्मद नईम को 27,829 मतों से हराया था। विधानसभा रिकॉर्ड के मुताबिक मयंकेश्वर शरण सिंह यहां से चार बार विधायक रह चुके हैं। वह 1993 और 2002 में भाजपा, 2007 में सपा और फिर 2017 व 2022 में लगातार भाजपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे हैं।

वहीं, 184-जगदीशपुर (SC) सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और कभी कांग्रेस का अभेद्य किला मानी जाती थी। यहां से कांग्रेस के राम सेवक धोबी सात बार विधायक रहे। हालांकि, पिछले दो चुनावों से भाजपा के सुरेश कुमार यहां जीत दर्ज कर रहे हैं। 2022 के चुनाव में सुरेश कुमार ने 89,315 वोट हासिल कर कांग्रेस उम्मीदवार विजय कुमार को 22,824 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी।

गौरीगंज और अमेठी: सपा के मजबूत मोर्चे

185-गौरीगंज सीट पर समाजवादी पार्टी का मजबूत प्रभाव रहा है। 2022 के कड़े मुकाबले में सपा के राकेश प्रताप सिंह ने 79,040 वोट हासिल कर भाजपा के चंद्रप्रकाश मिश्रा मटियारी को 6,963 मतों से मात दी थी। राकेश प्रताप सिंह ने इससे पहले 2012 और 2017 में भी सपा के टिकट पर लगातार जीत दर्ज की थी।

जिले की सबसे चर्चित सीट 186-अमेठी पर 2022 में सपा की महाराजी प्रजापति ने 88,217 वोट पाकर भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय सिंह (70,121 वोट) को 18,096 वोटों के अंतर से पराजित किया। इससे पहले 2017 में यह सीट भाजपा की गरिमा सिंह ने जीती थी, जबकि 2012 में सपा के गायत्री प्रसाद प्रजापति यहां से विधायक चुने गए थे।

2027 की सियासी बिसात: बराबरी की जंग तोड़ने की चुनौती

2022 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया था कि अमेठी की जमीन पर भाजपा और सपा दोनों का अपना-अपना मजबूत जनाधार है। जहां ग्रामीण और कस्बाई समीकरणों के सहारे तिलोई और जगदीशपुर में भाजपा ने बढ़त बनाई, वहीं गौरीगंज और अमेठी विधानसभा क्षेत्रों में सपा ने अपनी पकड़ को और पुख्ता किया।

2027 के चुनाव में दोनों प्रमुख दलों के सामने इस 2-2 के संतुलन को तोड़कर पूरे जिले में बढ़त बनाने की सीधी चुनौती होगी। साथ ही, कांग्रेस के बदलते रुख और संभावित विपक्षी गठबंधनों की स्थिति भी इन चारों सीटों के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।