Airline Ticket: ध्यान दें, एयरलाइंस को ‘मलाई वाली बिल्ली’ समझिए!

ama jane do
नवल कान्त सिन्हा
नवल कान्त सिन्हा

नमस्कार! हमारा शो टेक ऑफ करने वाला है, सीट बेल्ट को बांध दीजिए। अच्छा, तो हुजूर त्योहार सिर पर हैं—दुर्गा पूजा, दशहरा, दिवाली, छठ यानी वो मौसम जब हर परदेशी को अपने घर की याद सताती है, मां के हाथ के बने पुए याद आते हैं। और रेलवे का आईआरसीटीसी (IRCTC) ऐप खोलते ही स्क्रीन पर लाल रंग में लिखा दिखता है वेटिंग लिस्ट 342।

अब ट्रेन से तो उम्मीद टूट गई है, तो बेचारा आम आदमी भारी मन से अपना गुल्लक देखता है और सोचता है कि चलो साल में एक बार ही तो घर जाना है, इस बार हवाई जहाज से चलेंगे और थोड़ा राजा बाबू वाली फीलिंग ले लेंगे। उसने वेबसाइट खोली, दिल्ली से पटना जो टिकट आम दिनों में 4,000 या 5,000 का होता था, उसका रेट देखकर आदमी की आंखें सीधे बाहर आकर कीबोर्ड पर गिर पड़ीं—32,000 रुपये! भाई साहब, 32,000 में तो आदमी पटना से ऊपर होता हुआ सीधे काठमांडू में मोमोज खाकर वापस आ जाए।

और जब इस डकैती… माफ़ कीजिएगा, इस डायनेमिक प्राइसिंग पर संसद और मीडिया में थोड़ा सा शोर मचा तो हमारे देश के नए-नवेले नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू साहब का एक ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और दिल को छू लेने वाला बयान आया। मंत्री जी ने बड़े सधे हुए अंदाज़ में फरमाया, “देखिए, सरकार टिकटों के किराए पर कोई कैप यानी अधिकतम सीमा तो नहीं लगाएगी, लेकिन हम एयरलाइंस से विनम्र अनुरोध करते हैं कि वो किराया वाजिब रखें.” “अमा जाने दो!” वाह मंत्री जी वाह! क्या अद्भुत समाधान निकाला है!