Varanasi Assembly Seats : पिंडरा से सेवापुरी तक, 8 सीटों की पूरी कहानी

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अजमल शाह
अजमल शाह

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2027) होने हैं और सभी राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। यूपी की राजनीति में बनारस यानी वाराणसी (Varanasi) का जिला सबसे खास है। इसकी मुख्य वजह यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से लगातार तीन बार से वाराणसी लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर रहे हैं।

वाराणसी जिले में विधानसभा की कुल 8 सीटें आती हैं। इनमें से 6 सीटें (रोहनिया, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी कैंट, सेवापुरी, पिंडरा) वाराणसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं, जबकि 2 सीटें (अजगरा और शिवपुर) चंदौली लोकसभा सीट के अंतर्गत आती हैं। 2026 की नवीनतम मतदाता सूची के अनुसार, इन 8 विधानसभा सीटों पर कुल 27,30,603 मतदाता हैं।

आइए, 2027 के चुनावों से पहले समझते हैं वाराणसी की इन 8 सीटों का भौगोलिक, जातीय और सियासी समीकरण:

वाराणसी जिले का भौगोलिक और सामाजिक ढांचा

वाराणसी की सीमाएं जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर और भदोही जिलों से लगती हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार:

  • आबादी: जिले की कुल आबादी करीब 36.76 लाख थी।

  • धर्म: वाराणसी की आबादी में 84.5% हिंदू और लगभग 14.9% मुस्लिम हैं।

  • जनसांख्यिकी: जिले की 56.6% आबादी ग्रामीण है और अनुसूचित जाति (SC) की आबादी करीब 13.2% है।

पिछले 3 चुनावों में BJP का लगातार बढ़ा ग्राफ

वाराणसी की राजनीति में पिछले तीन चुनावों में बड़ा बदलाव देखा गया है:

  • 2012: मुकाबला बिखरा हुआ था। BJP ने 3, BSP ने 2 और SP, अपना दल तथा कांग्रेस ने 1-1 सीट जीती थी।

  • 2017: समीकरण पूरी तरह BJP के पक्ष में आ गए। BJP ने 6 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी दलों (अपना दल और SBSP) ने 1-1 सीट पर कब्जा किया। विपक्ष का खाता भी नहीं खुला।

  • 2022: BJP गठबंधन ने और बेहतर प्रदर्शन किया। BJP ने खुद 7 सीटें जीतीं और 1 सीट उसकी सहयोगी अपना दल के खाते में गई।

वाराणसी की 8 विधानसभा सीटों का विश्लेषण और 2022 के नतीजे

1. पिंडरा (Pindra) यह एक सामान्य और मुख्य रूप से ग्रामीण सीट है (98.2% ग्रामीण आबादी)। यहां SC आबादी 18.7% और मुस्लिम 7% हैं।

  • 2022 नतीजे: BJP के अवधेश कुमार सिंह (84,325 वोट – 38.23%) ने BSP के बाबूलाल (22.11%) और कांग्रेस के अजय राय (21.88%) को करीब 16% के बड़े अंतर से हराया था।

2. अजगरा – SC (Ajagara) यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है। यहां SC आबादी 21% से अधिक है और ग्रामीण आबादी 95% से ज्यादा है।

  • 2022 नतीजे: BJP के त्रिभुवन राम ने 41.25% वोट हासिल कर SBSP के सुनील सोनकर (37.51%) को बेहद करीबी मुकाबले में करीब 3.74% वोटों के अंतर से हराया था।

3. शिवपुर (Shivpur) शिवपुर ग्रामीण परिवेश वाली सामान्य सीट है। यहां राजभर, SC (15%) और मुस्लिम (13%) वोटर निर्णायक भूमिका में हैं।

  • 2022 नतीजे: भाजपा के दिग्गज नेता अनिल राजभर (45.76%) ने अपने प्रतिद्वंद्वी SBSP के अरविंद राजभर (34.77%) को सीधे मुकाबले में 27,687 वोटों से हराया था।

4. रोहनिया (Rohaniya) मिर्जापुर-प्रयागराज मार्ग पर स्थित यह सीट ग्रामीण बहुल (70%) है। यहां पिछड़े वर्ग (विशेषकर पटेल-कुर्मी) का खासा प्रभाव है।

  • 2022 नतीजे: BJP गठबंधन की ओर से अपना दल (सोनेलाल) के डॉ. सुनील पटेल (48.08%) ने अपना दल (कमेरावादी) के अभय पटेल (29.25%) को 46,472 वोटों के बड़े अंतर से मात दी थी।

5. सेवापुरी (Sewapuri) यह पूरी तरह से ग्रामीण सीट है (90% से ज्यादा ग्रामीण)। यहां का चुनाव पिछड़े वर्ग, दलित और मुस्लिम समीकरणों पर टिका होता है।

  • 2022 नतीजे: भाजपा के नील रतन सिंह ने 47.60% वोट पाकर सपा के सुरेंद्र सिंह पटेल (37.41%) को करीब 22 हजार वोटों से हराया था।

शहरी वाराणसी: नॉर्थ, साउथ और कैंट का समीकरण

वाराणसी शहर को तीन विधानसभा क्षेत्रों में बांटा गया है। तीनों सामान्य सीटें हैं और इनकी 95% से ज्यादा आबादी शहरी है।

  • 6. वाराणसी कैंट (Varanasi Cantt): यह BJP का सबसे मजबूत गढ़ है। 2022 में भाजपा के सौरभ श्रीवास्तव ने एकतरफा मुकाबले में 60.63% वोट हासिल कर सपा को लगभग 86 हजार वोटों से हराया था।

  • 7. वाराणसी उत्तर (Varanasi North): पुराने और नए शहर वाले इस इलाके में 15% मुस्लिम आबादी है। 2022 में BJP के रविंद्र जायसवाल ने 54.61% वोट पाकर सपा को 40 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी।

  • 8. वाराणसी दक्षिण (Varanasi South): पुरानी काशी और घनी आबादी वाली इस सीट पर मुकाबला सबसे कड़ा रहता है। 2022 में BJP के डॉ. नीलकंठ तिवारी (50.88%) ने सपा को महज 10,722 वोटों (45.41%) के मामूली अंतर से हराया था।

2027 का नजरिया: 2022 के नतीजे साफ बताते हैं कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में BJP का मजबूत दबदबा है। 2027 के चुनाव में देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्षी दल PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और नए गठबंधन समीकरणों के जरिए पीएम मोदी के इस मजबूत गढ़ में सेंध लगा पाते हैं या नहीं।