सिकंदराबाद में BJP क्यों मजबूत? 2022 में लालू के दामाद को हराया

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Ajay Gupta
Ajay Gupta

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की सिकंदराबाद विधानसभा सीट पर पिछले एक दशक से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत दबदबा कायम है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों से इस सीट पर बीजेपी लगातार जीत दर्ज कर रही है। वर्तमान में यहां से बीजेपी के लक्ष्मी राज सिंह विधायक हैं, जिनकी गिनती राज्य के सबसे युवा विधायकों में होती है। उन्होंने 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के दामाद राहुल यादव को बड़े अंतर से हराया था।

2022 का चुनाव: टिकट बदला और लक्ष्मी राज ने हासिल की बड़ी जीत

2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए लगातार दो बार की विधायक बिमला सिंह सोलंकी का टिकट काट दिया था। उनकी जगह छात्र राजनीति से निकले लक्ष्मी राज सिंह को मैदान में उतारा गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छात्र इकाई ABVP से राजनीति की शुरुआत करने वाले लक्ष्मी राज 2004 में आईपी डिग्री कॉलेज, बुलंदशहर के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे थे।

इस चुनाव में लक्ष्मी राज सिंह ने 1,25,644 वोट हासिल कर सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी राहुल यादव को 29,343 वोटों से मात दी। राहुल यादव को 96,301 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के मनवीर सिंह 42,634 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। राहुल यादव के पिता जितेंद्र यादव भी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहे हैं। 2017 की तुलना में अपने वोट बैंक में काफी सुधार करने के बावजूद राहुल यादव इस सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सके।

2017 और 2012: 123 वोटों की मामूली जीत से 28 हजार के अंतर तक

सिकंदराबाद सीट पर बीजेपी की जीत का सिलसिला 2012 में शुरू हुआ था। उस चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी बिमला सिंह सोलंकी और बसपा के सलीम अख्तर खान के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। बिमला सोलंकी (45,799 वोट) ने सलीम अख्तर (45,676 वोट) को मात्र 123 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया था। सपा के बदरुल इस्लाम 43,535 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे।

2017 के चुनाव में बिमला सिंह सोलंकी ने अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली। उन्होंने 1,04,956 वोट हासिल कर बसपा के मोहम्मद इमरान (76,333 वोट) को 28,623 वोटों के बड़े अंतर से हराया। सपा के राहुल यादव को इस चुनाव में 48,910 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर खिसक गए थे। 2012 की तुलना में यह बीजेपी के लिए एक बड़ी जीत थी।

क्षत्रिय और मुस्लिम वोटरों का है दबदबा

इस सीट के सामाजिक और जातीय ताने-बाने की बात करें तो यहां मुख्य रूप से क्षत्रिय और मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव है। uttar pradesh.org के आंकड़ों के मुताबिक, सिकंदराबाद विधानसभा सीट पर क्षत्रिय और मुस्लिम दोनों समुदायों की आबादी करीब 80-80 हजार है। इसके बाद अनुसूचित जाति (दलित) के करीब 70 हजार मतदाता आते हैं। यादव, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और जाट मतदाताओं की संख्या 35 से 40 हजार के बीच आंकी गई है।