संजय निषाद और माता प्रसाद पांडेय की मुलाकात पर सियासत तेज, मंत्री ने दी सफाई

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने सोमवार को लखनऊ में राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के एक प्रमुख सहयोगी दल के नेता की मुख्य विपक्षी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता से इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गई थीं। संजय निषाद ने खुद इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा किया था। अब उन्होंने इस मुलाकात और राजनीतिक चर्चाओं पर अपनी सफाई दी है।
‘बीमार बुजुर्ग नेता से मिलना मेरा कर्तव्य’
संजय निषाद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में इस मुलाकात को लेकर लग रही अटकलों को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुलाकात के गलत मायने निकाले जा रहे हैं।
निषाद ने कहा, “वो हमारे पुराने और वरिष्ठ नेता हैं। जब हम युवा थे, तब वे हमारे मार्गदर्शक रहे हैं। अब वह बीमार थे, तो उनसे मिलना हमारा कर्तव्य बनता है।”
इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जब दो राजनीतिक नेता मिलते हैं, तो राजनीति पर चर्चा स्वाभाविक रूप से होती है। बातचीत के दौरान गोंडा में मारे गए विनोद साहनी का मुद्दा भी उठा। निषाद के मुताबिक, उन्होंने माता प्रसाद पांडेय से कहा कि अगर एससी/एसटी एक्ट को हटाया नहीं गया होता, तो शायद विनोद साहनी के साथ ऐसी घटना नहीं घटती।
आरक्षण के मुद्दे पर सपा और बीजेपी को दो टूक
नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात के दौरान निषाद ने आरक्षण के पुराने मुद्दे को भी याद दिलाया। उन्होंने कहा, “आपके (सपा के) कार्यकाल में ही यह बात उठी थी कि इसे ओबीसी से हटाकर अनुसूचित जाति में जोड़ा जाना चाहिए और इस पर चर्चा होनी चाहिए।”
अपनी राजनीतिक स्थिति साफ करते हुए निषाद ने गठबंधन को लेकर सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पहले से ही यह कहती आ रही है कि जब समाजवादी पार्टी ने उनकी मांगें बंद कीं, तो वे बीजेपी के साथ आ गए। अगर भविष्य में बीजेपी भी उनकी मांगें बंद करेगी, तो उस पर भी विचार किया जाएगा।
धर्मपाल से हुई बैठक, आरक्षण के पत्रों पर हुई चर्चा
नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात के अलावा संजय निषाद ने शाम को एक पूर्व निर्धारित बैठक भी की। उन्होंने बताया कि उनकी शाम को धर्मपाल के साथ बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा निषाद आरक्षण था।
उन्होंने बताया कि चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि निषाद आरक्षण के संबंध में मुख्यमंत्री द्वारा रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) को लिखा गया पत्र और 2022 में गृह मंत्री द्वारा RGI को लिखा गया पत्र सामाजिक न्याय मंत्रालय के समक्ष उठाया जाना चाहिए। इन पत्रों में स्पष्ट किया गया है कि केवट, मल्लाह और मझवार जातियां अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में आती हैं।
गोंडा हत्याकांड पर सरकार के सामने कड़ा रुख
संजय निषाद हाल के दिनों में अपने समुदाय से जुड़े मुद्दों, विशेषकर 9 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर काफी मुखर रहे हैं। पिछले दिनों गोंडा में हुई विनोद साहनी की हत्या के मामले में भी उन्होंने पुलिस-प्रशासन के रवैये की कड़ी आलोचना की थी।
गोंडा में विरोध प्रदर्शन के दौरान निषाद पार्टी प्रमुख ने आरोपियों के एनकाउंटर और उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने की खुली मांग की थी। उनके इस कड़े रुख और यह चेतावनी देने से कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी, प्रदेश की बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार कुछ समय के लिए असहज स्थिति में आ गई थी।
