दिनेश शर्मा बने अंडमान-निकोबार के LG, क्या है BJP का ‘ब्राह्मण प्लान’?

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल (LG) नियुक्त किया गया है। आगामी यूपी विधानसभा चुनाव से पहले इसे पारंपरिक ब्राह्मण वोट बैंक को कड़ा संदेश देने और पार्टी के भीतर नए चेहरों के लिए जगह बनाने की एक बड़ी रणनीतिक पहल माना जा रहा है।

सक्रिय राजनीति से सम्मानजनक विदाई दिनेश शर्मा का राज्यसभा कार्यकाल इसी साल नवंबर में समाप्त होने वाला था। यदि उन्हें दोबारा उच्च सदन भेजा जाता, तो वे मोदी कैबिनेट में मंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार बन जाते।

  • उपराज्यपाल बनाए जाने से न केवल उन्हें एक बड़ा संवैधानिक पद मिला है, बल्कि यूपी से किसी अन्य ब्राह्मण नेता को राज्यसभा भेजने और केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल करने का रास्ता भी साफ हो गया है।

  • लखनऊ के दो बार मेयर, यूपी के डिप्टी सीएम और आरएसएस (RSS) पृष्ठभूमि से आने वाले दिनेश शर्मा की छवि हमेशा एक सौम्य और विवाद-रहित नेता की रही है।

ब्राह्मणों की नाराजगी और BJP का ‘डैमेज कंट्रोल’ यूपी में राजपूत मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ब्राह्मण समुदाय लंबे समय से सरकार और संगठन में अपनी उपेक्षा की शिकायत कर रहा था। यूजीसी (UGC) की नई गाइडलाइंस ने इस असंतोष को और भड़का दिया था, जिसका खामियाजा पार्टी को हालिया उपचुनावों में भी उठाना पड़ा।

  • विपक्षी खेमे से अखिलेश यादव के ‘PDA’ (जिसमें उन्होंने P का अर्थ पंडित बताया) के नैरेटिव को बेअसर करने के लिए बीजेपी ने यह कूटनीतिक कदम उठाया है।

  • संगठन स्तर पर डैमेज कंट्रोल करते हुए हाल ही में हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री और शिवानंद द्विवेदी को सोशल मीडिया टीम का सह-संयोजक नियुक्त किया गया है।

  • आने वाले समय में मोदी कैबिनेट के फेरबदल में यूपी से किसी ब्राह्मण नेता को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की भी प्रबल चर्चा है।

ब्रजेश पाठक के हाथों में आउटरीच की कमान वर्तमान में यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ब्राह्मण समुदाय से सीधे संवाद का मोर्चा संभाले हुए हैं। आरक्षण को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों से मुलाकात के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से उनकी वार्ता कराई। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में यह आश्वासन भी दिया गया है कि विवादित यूजीसी गाइडलाइंस पर पुनर्विचार किया जाएगा। बीजेपी को उम्मीद है कि इन अहम नियुक्तियों और सम्मान के जरिए वह अपने इस मजबूत और पारंपरिक वोट बैंक को पूरी तरह से साधे रखने में कामयाब होगी।