जगरनाथ से रामदास और अब सुदिव्य, झारखंड में 3 शिक्षा मंत्रियों का दुखद अंत

Sudivya Kumar Sonu
शैलेन्द्र कुमार झा
शैलेन्द्र कुमार झा

झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन ने पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ा दी है। गिरिडीह में आज उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुदिव्य सोनू के निधन के साथ ही झारखंड की राजनीति में एक बेहद दुखद और हैरान करने वाला संयोग सामने आया है, जिसने सियासी गलियारों से लेकर शिक्षा जगत तक को झकझोर कर रख दिया है।

दरअसल, पिछले साढ़े तीन वर्षों में झारखंड सरकार में जिन तीन मंत्रियों ने शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाली है, उन तीनों का ही पद पर रहते हुए असमय निधन हुआ है। इस मार्मिक संयोग की चर्चा अब पूरे राज्य में हो रही है।

1. ‘टाइगर’ जगरनाथ महतो (6 अप्रैल 2023)

इस दुखद सिलसिले की शुरुआत तत्कालीन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री जगरनाथ महतो के निधन से हुई। अपने जुझारू तेवर के लिए ‘टाइगर’ के नाम से मशहूर महतो कोरोना संक्रमण के बाद से लगातार बीमार थे।

  • नवंबर 2020 में उनका फेफड़े का प्रत्यारोपण (Lung Transplant) हुआ था।

  • स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें चेन्नई ले जाया गया, जहां 6 अप्रैल 2023 को उनका निधन हो गया। सरकार ने उनके सम्मान में दो दिन का राजकीय शोक घोषित किया था।

2. मंत्री रामदास सोरेन (15 अगस्त 2025)

जगरनाथ महतो के निधन के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की जिम्मेदारी रामदास सोरेन को दी गई थी। ग्राम प्रधान से मंत्री पद तक का सफर तय करने वाले रामदास सोरेन के साथ भी एक दर्दनाक हादसा हुआ।

  • 2 अगस्त 2025 को वे अपने आवास के बाथरूम में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

  • उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के अपोलो अस्पताल एयरलिफ्ट किया गया, लेकिन 15 अगस्त 2025 को 62 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

3. सुदिव्य कुमार सोनू (6 सितंबर 2026)

अब इस दुखद कड़ी में तीसरा नाम गिरिडीह सदर से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का जुड़ गया है। वे उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ नगर विकास, पर्यटन, और खेलकूद जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

  • 6 सितंबर 2026 को अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गिरिडीह के मर्सी अस्पताल ले जाया गया।

  • रिपोर्टों के मुताबिक, इलाज के दौरान कार्डियक अरेस्ट (हार्ट अटैक) से उनका आकस्मिक निधन हो गया।

अधूरी रह गईं शिक्षा विभाग की चुनौतियां और लक्ष्य

अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार सोनू का नाम अब इस दर्दनाक संयोग से जुड़ गया है। सरकारी स्कूलों की व्यवस्था, उच्च शिक्षा का विस्तार और शिक्षकों की उपलब्धता जैसे अहम मुद्दों को सुधारने का लक्ष्य लेकर चल रहे इन मंत्रियों की असमय विदाई से शिक्षा विभाग के कई बड़े लक्ष्य अधूरे रह गए। साढ़े तीन वर्षों में तीन मंत्रियों को खोना हेमंत सोरेन सरकार और झारखंड की राजनीति के इतिहास में एक ऐसा दुखद अध्याय बन गया है, जिसे भुला पाना आसान नहीं होगा।