एक टीचर ने मेरे डर को आवाज दी, आज मैं पत्रकार हूं और सवाल पूछता हूं

वह बच्चा बहुत छोटा था। क्लास दो-तीन का। हद से ज्यादा शर्मीला। इतना कि अपनी ही माँ से आसानी से बात नहीं कर पाता था। बेहद इमोशनल। हर वक्त किसी न किसी बात से परेशान। पढ़ाई में मन नहीं लगता था। बेवजह का डर उसके साथ रहता था—अपने ही घर में एक कमरे से दूसरे कमरे में अकेले जाने से भी काँप जाता था। दादा-दादी का प्यार था, माँ-बाप का लाड़ था, फिर भी अंदर कोई खालीपन कचोटता रहता था। कुछ ऐसा जो शब्दों में नहीं कहा जा सकता था, लेकिन रोज़ महसूस होता था।
स्कूल भी बदल चुके थे। क्लास दो में एक, क्लास तीन में दूसरा। हर नई जगह पर वही डर, वही सिकुड़न, वही “मैं कुछ नहीं कर सकता” वाली आवाज़। फिर आया क्लास थर्ड। और मिलीं एक टीचर।
उन्होंने पहली बार उस बच्चे को देखा। पढ़ाई की कोई बात नहीं की। न किताब खोली, न होमवर्क पूछा। बस उससे पूछा—“तुम्हें क्या अच्छा लगता है? क्या पसंद नहीं है?” बच्चे ने आँखें उठाकर देखा। किसी ने पहले कभी ऐसे नहीं पूछा था। टीचर ने उसके बारे में पढ़ना शुरू किया—उसके डर को, उसकी खामोशी को, उसकी आँखों में छिपी बेचैनी को।
जादू एक दिन में नहीं हुआ। धीरे-धीरे हुआ। दिन-ब-दिन। क्लास थर्ड से एर्थ तक। उस बच्चे के अंदर का डर कम होता गया। आत्मविश्वास बढ़ता गया। पढ़ाई में टॉपर नहीं बना, लेकिन क्लास में सबसे पीछे भी नहीं रहा। टीचर ने उसकी कमजोरी को उसकी ताकत बना दिया। शर्मीलेपन को संवेदनशीलता में बदल दिया। डर को साहस में।
टीचर के लिए वह बच्चा सिर्फ एक छात्र नहीं था। वह उनका अपना बच्चा था। आज वह बच्चा देश का जाना-माना पत्रकार है। घोटाले खोलता है। सच्चाई सामने लाता है। फ्रेशर को मोटिवेट करता है। उसके जूनियर आज बड़े संस्थानों में ऊँचे पदों पर हैं। वह बच्चा, जो कभी अपनी माँ से भी बात नहीं कर पाता था, आज पूरे देश से बात करता है। यह सब हुआ एक टीचर की वजह से।
जो सिर्फ सिखाती नहीं, बल्कि देखती हैं। जो सिर्फ नंबर नहीं माँगतीं, बल्कि दिल समझती हैं। जो बच्चे की कमजोरी को हथियार बना देती हैं। आज जब वह पत्रकार किसी स्टूडियो में बैठकर सवाल पूछता है, या किसी युवा को हौसला देता है, तो उसके मन में कभी-कभी वह क्लास थर्ड वाली टीचर आ जाती हैं। जिन्होंने एक डरते हुए बच्चे को खड़ा होना सिखाया।
शायद असली शिक्षा यही है—किताबों से ज्यादा, एक बच्चे को यह विश्वास दिलाना कि वह अकेला नहीं है। और वह कर सकता है। धन्यवाद, टीचर। आपके एक सवाल ने एक पूरी जिंदगी बदल दी। और वो बच्चा मै हूँ।
