‘मुसलमान कोई गैर नहीं, हमारे ही भाई हैं’, भागवत के बयान के समर्थन में संत

हरिद्वार: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए धर्म, मानवता और हिंदू-मुस्लिम संबंधों वाले बयान को अब संत समाज का भी मजबूत समर्थन मिला है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने भागवत के बयान की खुले तौर पर सराहना करते हुए समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देने की अपील की है।
‘रास्ते अलग, लेकिन ईश्वर और खुदा तक पहुंचने की मंजिल एक’
हरिद्वार में अपने विचार साझा करते हुए महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ (सभी सुखी रहें) का संदेश देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म और उपासना की पद्धतियां अलग-अलग जरूर हो सकती हैं, लेकिन सभी का अंतिम लक्ष्य ईश्वर तक पहुंचना ही है।
मुस्लिम समाज को लेकर उन्होंने कहा, “भारत में रहने वाले मुसलमान कोई गैर नहीं, बल्कि हमारे ही भाई हैं। उन्हें अपनाने और उनके साथ भाईचारा कायम रखने की जरूरत है। ईश्वर और खुदा तक पहुंचने के रास्ते भले अलग हों, लेकिन मंजिल एक ही है। इसलिए समाज में वाद-विवाद, नफरत और लड़ाई-झगड़े की कोई आवश्यकता नहीं है।”
सबको एक ही नजर से देखना अनुचित
महंत रवींद्र पुरी ने समाज को संदेश दिया कि सभी मुसलमानों को एक ही चश्मे से देखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में एक बड़ी आबादी ऐसे लोगों की है, जो सनातन परंपराओं और हिंदू संस्कृति का पूरा सम्मान करते हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में चल रही सनातन विरोधी गतिविधियों का पुरजोर विरोध होना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही आम लोगों के बीच एकता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने भागवत के बयान को समाज को जोड़ने वाली एक सकारात्मक पहल बताया और कहा कि अब मतभेदों को पीछे छोड़कर एक-दूसरे को अपनाने का समय है।
अमेरिका में क्या बोले थे संघ प्रमुख?
आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड-वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम को संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि भले ही पूजा-पद्धतियां अलग-अलग हों, लेकिन अंतिम सत्य और मानवता एक ही है। भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया था कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं और समाज में हर इंसान की गरिमा एक समान है।
