भागवत के संदेश पर मौलाना शहाबुद्दीन बोले, ‘नफरत का इलाज इंसानियत’

बरेली: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के अमेरिका के न्यूयॉर्क में दिए गए बयान का खुलकर समर्थन किया है। मौलाना रजवी ने भागवत के बयान को एक सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि इंसानियत को सबसे ऊपर रखकर ही समाज के सभी वर्गों को एकजुट रखा जा सकता है।
‘बिना मुसलमानों के इंसानियत जिंदा नहीं रह सकती’
आरएसएस प्रमुख के अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिए गए संबोधन का जिक्र करते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि न्यूयॉर्क में एक बड़ी हिंदू कम्युनिटी के सामने डॉ. भागवत ने एक बेहद सकारात्मक बात कही है।
मुस्लिम जमात के अध्यक्ष के मुताबिक, “भागवत जी ने स्पष्ट किया कि बगैर मुसलमानों के इंसानियत जिंदा नहीं रह सकती। कोई व्यक्ति किसी भी धर्म को मानने वाला हो, उसकी इबादत के तौर-तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन सबके भीतर जो इत्तेहाद और एकजुटता है, वह असल में इंसानियत ही है।” मौलाना ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भागवत द्वारा कही गई इस बात का स्वागत करते हुए इसे सभी को समझाने वाली एक अच्छी पहल करार दिया।
पैगंबर-ए-इस्लाम के जीवन और इंसानियत का हवाला
मौलाना रजवी ने इस संदर्भ में पैगंबर-ए-इस्लाम के जीवन का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की पूरी जीवनी पढ़ें तो वह इंसानियत से भरी हुई मिलेगी, क्योंकि उन्होंने हमेशा सिर्फ इंसानियत की ही बात की है।
आपदा, पड़ोसी और बीमार की मदद में मजहब न देखने की अपील
समाज में आपसी भाईचारे और मदद को लेकर मौलाना ने इस्लामी शिक्षाओं के कुछ व्यावहारिक उदाहरण सामने रखे:
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आपदा में राहत: उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय यह नहीं देखा जाना चाहिए कि प्रभावित व्यक्ति किस मजहब का है। हर मजहब के लोगों, विशेषकर मुसलमानों को वहां पहुंचकर हर संभव मदद करनी चाहिए।
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पड़ोसी के अधिकार: पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पड़ोसी की मदद करते समय उसका मजहब नहीं देखा जाता। अगर पड़ोसी भूखा है तो उसे खाना खिलाना और प्यासा है तो पानी पिलाना जरूरी है।
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बीमार की सेवा: बीमार व्यक्ति की मदद के दौरान भी धर्म या मजहब आड़े नहीं आना चाहिए। बीमार की जितनी भी मदद की जा सकती है, वह की जानी चाहिए।
नफरत भरे माहौल को खत्म करने पर जोर
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मौजूदा सामाजिक स्थिति पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज के दौर में जो नफरत भरा माहौल बन गया है, उसे खत्म करने की सख्त जरूरत है। उनका मानना है कि इंसानियत ही एक ऐसा फलसफा है, जिसके जरिए समाज के तमाम तबकों को एक साथ जोड़कर रखा जा सकता है।
