E20 विवाद के बीच BPCL की सफाई, क्या पेट्रोल पंपों पर फिर मिलेगा E10?

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अजमल शाह
अजमल शाह

नई दिल्ली : केंद्र सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी (Ethanol Blending Policy) के बीच पुरानी गाड़ियों के लिए E10 (नॉर्मल) पेट्रोल की वापसी की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने हाल ही में सुझाव दिया था कि पुरानी गाड़ियों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ E10 पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इस बहस के बीच सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम (BPCL) के चेयरमैन और एमडी संजय खन्ना ने स्पष्ट किया है कि सरकार की मौजूदा E20 नीति को वापस लेने या उसे E10 से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

बयान को गलत तरीके से किया गया पेश

गुरुवार को कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) के बाद मीडिया से बातचीत में संजय खन्ना के बयान को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बन गई थी। इसके बाद BPCL ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया। कंपनी ने कहा कि चेयरमैन के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है, जिससे यह संदेश गया कि E10 पर E20 के विकल्प के तौर पर विचार किया जा रहा है।

संजय खन्ना ने साफ कहा, “मैंने कभी नहीं कहा कि E20 को E10 में बदला जाएगा। वर्तमान में केवल इस बात पर चर्चा हो रही है कि क्या पुराने वाहनों के लिए 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E10) का अलग विकल्प उपलब्ध कराया जाना चाहिए।”

मल्टीपल ग्रेड सप्लाई में व्यावहारिक चुनौतियां

अगर सरकार भविष्य में पेट्रोल पंपों पर E10 और E20 दोनों ईंधन समानांतर रूप से बेचने का फैसला करती है, तो तेल कंपनियों को इसके लिए तैयार रहना होगा। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, बीपीसीएल चेयरमैन ने बताया कि E20 से E10 या किसी अन्य मिश्रण पर जाने में कंपनी को कोई बड़ा परिचालन (Operational) या लॉजिस्टिक संकट नहीं दिखाई देता।

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक साथ कई ग्रेड के पेट्रोल की आपूर्ति और वितरण (Supply and Distribution) को लेकर व्यावहारिक चुनौतियां जरूर मौजूद हैं। एक अतिरिक्त ग्रेड के पेट्रोल को सप्लाई चेन में समानांतर रूप से संभालना आसान नहीं होता।

क्या E20 फ्यूल से पुरानी गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं?

हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि 2023 से पहले बनी गाड़ियां E20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं हैं। इन दावों के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक फैक्टशीट जारी कर ऐसी रिपोर्टों का खंडन किया है।

बीपीसीएल ने भी स्पष्ट किया कि पिछले तीन साल से ज्यादा समय से लाखों वाहन E20 और E15 फ्यूल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस दौरान इंजन खराब होने या किसी अन्य समस्या का कोई तकनीकी सबूत नहीं मिला है। मंत्रालय के फैक्टशीट के अनुसार, यदि एथेनॉल मिश्रण से इंजनों या फ्यूल सिस्टम को व्यापक नुकसान हो रहा होता, तो वाहन निर्माता कंपनियों के पास वारंटी दावों की बाढ़ आ जाती और सर्विस कैंपेन चलाने पड़ते, लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर में ऐसा कोई रुझान देखने को नहीं मिला है। बीपीसीएल ने दोहराया कि वह नेशनल इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का समर्थन जारी रखेगी।

E10 और E20 पेट्रोल में क्या अंतर है?

E10 पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल और 90 प्रतिशत पेट्रोल होता है, जबकि E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। केंद्र सरकार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के जरिए पेट्रोलियम आयात पर देश की निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लक्ष्य पर काम कर रही है। भारत में अभी बड़े पैमाने पर E20 फ्यूल की ही सप्लाई की जा रही है।