फर्जी दुल्हन, असली ठगी! मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 9 गिरफ्तार

ऑनलाइन शादी के लिए दुल्हन की तलाश कर रहे पुरुषों को अपना शिकार बनाने वाले एक बड़े फर्जी मैट्रिमोनियल नेटवर्क का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह पूरा गोरखधंधा उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित एक कॉल सेंटर से चलाया जा रहा था। ‘शादी पार्टनर डॉट कॉम’ (Shaadi Partner dot com) नाम की फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों को फंसाया जाता था और कॉल सेंटर की लड़कियां खुद को दुल्हन बताकर उनसे बात करती थीं।
कैसे होता था ठगी का खेल?
ठगी की शुरुआत पुरुषों की आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगाने से होती थी। इसके बाद इंटरनेट से उठाई गई महिलाओं की खूबसूरत तस्वीरें और फर्जी प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट व्हाट्सएप पर भेजे जाते थे। जब कोई युवक रिश्ता पसंद कर लेता, तो कॉल सेंटर की महिला कर्मचारी फोन पर खुद को ‘होने वाली दुल्हन’ बताकर बात करना शुरू कर देती थी।
भरोसा जीतने के लिए यह बातचीत कई दिनों तक चलती थी। जब पीड़ित पूरी तरह झांसे में आ जाता, तब लड़की के मांगलिक होने, परिवार के विरोध या कहीं और सगाई तय होने का बहाना बनाकर अचानक रिश्ता तोड़ दिया जाता था। युवक के दूसरे रिश्ते की मांग करने पर उसे फिर से नए प्रोफाइल दिखाकर ठगा जाता था।
2,500 से 15 हजार रुपये तक के थे पैकेज
ठगों ने शिकार फंसाने के लिए मिनी, मीडियम, रूबी और डायमंड जैसे बाकायदा पैकेज बना रखे थे। इनकी कीमत 2,500 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक थी। रजिस्ट्रेशन से लेकर अकाउंट एक्टिवेशन और नंबर अनलॉक करने के नाम पर अलग-अलग चार्ज वसूले जाते थे।
विज्ञापन देकर नौकरी पर रखी गई थीं लड़कियां
कॉल सेंटर में काम करने वाली महिलाओं को वर्कइंडिया, अपना ऐप और अखबारों के विज्ञापनों के जरिए नौकरी पर रखा गया था। उन्हें 6 से 7 हजार रुपये की बेसिक सैलरी और ठगी गई रकम पर 10% का इंसेंटिव मिलता था। हर कर्मचारी को 15 हजार रुपये की वसूली का मासिक टारगेट दिया जाता था।
मास्टरमाइंड निकला पेशे से वकील, खुद को बताता था ‘लीगल एडवाइजर’
इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड 29 वर्षीय कुमार है, जो पेशे से एक वकील (एडवोकेट) है। उसने जया नाम की महिला के जरिए ‘एम/एस शादी पार्टनर कॉम’ नाम से फर्म बनाई थी और खुद को सिर्फ ‘लीगल एडवाइजर’ बताता था ताकि उसका नाम सामने न आए। 4 सितंबर को जब पुलिस ने आगरा के सिकंदरा में कॉल सेंटर पर छापा मारकर जया और 8 कॉलर लड़कियों को पकड़ा, तो कुमार फरार हो गया। हालांकि, 8 सितंबर को पुलिस ने उसे भी क्रेटा कार से जाते हुए गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस से बचने के लिए निकाल रखा था रिफंड का तोड़
इस नेटवर्क ने पुलिस से बचने का भी एक शातिर तरीका निकाल रखा था। अगर कोई पीड़ित नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करता और उनका बैंक खाता फ्रीज हो जाता, तो कुमार खुद को सही कंपनी बताकर इसे ‘गलतफहमी’ करार देता और पैसे रिफंड कर देता था। शिकायत वापस होते ही खाता दोबारा खुल जाता और वे फिर से ठगी शुरू कर देते।
हजारों लोगों के शिकार होने की आशंका
पुलिस ने छापे के दौरान 47 मोबाइल फोन, 7 डेस्कटॉप, व्हाट्सएप चैट और कई वित्तीय लेनदेन का डेटा बरामद किया है। पुलिस का मानना है कि इस गैंग ने देशभर में हजारों लोगों को अपना शिकार बनाया है। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने अपील की है कि जो भी लोग इस फर्जीवाड़े का शिकार हुए हैं, वे कमला मार्केट स्थित साइबर पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
