‘वर्क फ्रॉम एनीवेयर इंडेक्स’ में मुंबई ने लंदन-मियामी को पछाड़ा, जानें 5 कारण

मुंबई: IWG (इंटरनेशनल वर्कप्लेस ग्रुप) के हालिया ‘वर्क फ्रॉम एनीवेयर इंडेक्स 2026’ में मुंबई ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इस सूचकांक में 77 अंकों के साथ मुंबई भारत का एकमात्र ऐसा शहर है जिसने इस सूची में जगह बनाई है। बड़ी बात यह है कि रिमोट वर्किंग (Remote Working) के मामले में मुंबई ने मियामी और लंदन जैसे वैश्विक महानगरों को भी पीछे छोड़ दिया है।
इस वैश्विक सूची में बैंकॉक, टोक्यो और बार्सिलोना ने शीर्ष तीन स्थानों पर कब्जा जमाया है। लेकिन भारत के लिहाज से सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि देश के प्रमुख टेक और कॉर्पोरेट हब जैसे बेंगलुरु, दिल्ली-NCR और पुणे इस सूची में जगह बनाने में क्यों विफल रहे?
कैसे तय होती है शहरों की रैंकिंग?
IWG का सालाना ‘वर्क फ्रॉम एनीवेयर इंडेक्स’ इस बात का आकलन करता है कि दुनिया भर के शहर ‘वर्ककेशन’ (Workation) यानी काम के साथ यात्रा करने वाले पेशेवरों की कितनी बेहतर मदद करते हैं।
इस इंडेक्स में किसी भी शहर की रैंकिंग मुख्य रूप से इन मानकों पर तय की जाती है:
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मौसम और पर्यावरण
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ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की गुणवत्ता
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रहने की जगह (आवास) की उपलब्धता
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सार्वजनिक परिवहन की स्थिति
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स्थानीय खान-पान और संस्कृति
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फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस (Co-working Spaces) की पहुंच
बेंगलुरु, पुणे और दिल्ली-NCR क्यों पिछड़े? मुंबई की सफलता के 5 कारण:
भले ही बेंगलुरु, पुणे और दिल्ली-NCR बड़े ऑफिस हब हैं, फिर भी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और रिमोट वर्कर्स के लिए मुंबई सबसे पसंदीदा भारतीय डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। इसके 5 मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस और प्रोफेशनल इकोसिस्टम एक सफल वर्ककेशन के लिए केवल आकर्षक पर्यटन स्थल होना पर्याप्त नहीं है; एक अच्छा वर्किंग माहौल भी जरूरी है। मुंबई भारत के सबसे बड़े फ्लेक्सिबल-ऑफिस मार्केट में से एक है। यहां 79.7 मिलियन वर्ग फुट से अधिक का फ्लेक्सिबल-ऑफिस स्टॉक मौजूद है, जो पेशेवरों को मीटिंग्स और कॉल्स के लिए बेहतरीन सुविधा देता है।
2. सुलभ और किफायती सार्वजनिक परिवहन रिमोट वर्कर्स के लिए परिवहन की लागत और सुगमता बहुत मायने रखती है। मुंबई के पास लोकल ट्रेनों, मेट्रो और कैब सेवाओं का एक विस्तृत और किफायती नेटवर्क है, जिससे हवाई अड्डे, रिहाइशी इलाकों और वर्कस्पेस के बीच दैनिक यात्रा बेहद आसान हो जाती है।
3. लंबे समय तक ठहरने के लिए अनुकूल आवास रिमोट वर्कर्स की जरूरतें आम पर्यटकों से अलग होती हैं। IWG के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 48% कर्मचारी अपने वर्किंग आवर्स के साथ छुट्टियां बढ़ाने की योजना बनाते हैं। मुंबई में उपलब्ध सर्विस्ड अपार्टमेंट्स और रिमोट-फ्रेंडली आवास विकल्प इन्हें आकर्षित करते हैं।
4. लाइफस्टाइल, कल्चर और वर्क-लाइफ बैलेंस वर्ककेशन का मुख्य उद्देश्य बर्नआउट (थकान) से बचना और वर्क-लाइफ बैलेंस सुधारना होता है। सर्वे में शामिल 54% यात्रियों ने इसे मुख्य वजह बताया। मुंबई का तटीय मौसम, विविध खान-पान, सांस्कृतिक परिदृश्य और नाइटलाइफ पेशेवरों को काम के बाद बेहतर रीक्रिएशन प्रदान करते हैं।
5. कम्यूट और लॉजिस्टिक की सुगमता विशेषज्ञों के अनुसार, बेंगलुरु और दिल्ली-NCR में व्यावसायिक बुनियादी ढांचा मजबूत है, लेकिन वहां की ट्रैफिक व्यवस्था और लंबी यात्रा का समय वर्ककेशन के अनुभव को खराब करता है। इसके विपरीत, मुंबई में दैनिक यात्रा की सुगमता इसे अधिक व्यावहारिक बनाती है।
मुंबई का कमजोर पहलू: कनेक्टिविटी में सुधार की दरकार वैश्विक सूची में शामिल होने के बावजूद, मुंबई का प्रदर्शन सभी मानकों पर 100 फीसदी सही नहीं रहा। IWG के सर्वेक्षण में 38% रिमोट वर्कर्स ने मजबूत और स्थिर वाई-फाई कनेक्टिविटी को अपनी प्राथमिक जरूरत बताया है। मुंबई ने इसी ब्रॉडबैंड की गति और गुणवत्ता के साथ-साथ लोकल इवेंट्स की संख्या के मामले में अंक गंवाए हैं।
भविष्य में यदि मुंबई को बार्सिलोना या बैंकॉक की बराबरी करनी है, तो उसे अपनी डिजिटल कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार करना होगा। यह रिपोर्ट साफ करती है कि केवल एक ‘आईटी हब’ होना काफी नहीं है, बल्कि परिवहन, लाइफस्टाइल, आवास और कार्य वातावरण का सही तालमेल ही किसी शहर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाता है।
