महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य क्यों है? जानिए पूरा खेल

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

जब देश में प्याज के दाम बढ़ते हैं तो महाराष्ट्र का नाम सबसे पहले चर्चा में आता है। इसकी वजह भी है। भारत के प्याज उत्पादन और सप्लाई में महाराष्ट्र की बड़ी भूमिका है। देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचने वाले प्याज का बड़ा हिस्सा इसी राज्य से आता है। दिल्ली से लेकर कोलकाता और दक्षिण भारत के बाजारों तक महाराष्ट्र के प्याज की मौजूदगी दिखाई देती है।

लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा क्या है जो प्याज की खेती के लिए इसे इतना अहम बनाता है? इसका जवाब केवल मिट्टी में नहीं छिपा है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां, मौसम, खेती के अलग-अलग सीजन, सिंचाई, भंडारण और मजबूत मंडी नेटवर्क मिलकर महाराष्ट्र को प्याज उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाते हैं।

दक्कन की मिट्टी प्याज के लिए कितनी उपयोगी?

महाराष्ट्र के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में दक्कन के पठार की काली मिट्टी पाई जाती है। इसे आम तौर पर Black Cotton Soil कहा जाता है। इस मिट्टी में चिकनी मिट्टी यानी clay की मात्रा अधिक होती है और यह नमी को रोककर रखने की क्षमता के लिए जानी जाती है।

प्याज की फसल के लिए मिट्टी में नमी जरूरी है, लेकिन खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहना नुकसान पहुंचा सकता है। यही वजह है कि प्याज की खेती में मिट्टी की जलधारण क्षमता के साथ जल निकासी भी महत्वपूर्ण होती है।

महाराष्ट्र के कई प्याज उत्पादक क्षेत्रों में मिट्टी और सिंचाई की परिस्थितियां इस फसल के अनुकूल हैं। मिट्टी में मौजूद विभिन्न पोषक तत्व भी फसल की वृद्धि में भूमिका निभाते हैं। हालांकि, प्याज की गुणवत्ता केवल मिट्टी से तय नहीं होती। बीज की किस्म, सिंचाई, मौसम, खाद और खेती की तकनीक का भी असर पड़ता है।

मौसम देता है प्याज की खेती को बढ़त

महाराष्ट्र की प्याज कहानी में मौसम की भी बड़ी भूमिका है। राज्य के कई हिस्सों में अपेक्षाकृत शुष्क और धूप वाले हालात मिलते हैं, जो प्याज की खेती के लिए उपयोगी माने जाते हैं।

यहां प्याज की खेती अलग-अलग मौसम में की जाती है। प्रमुख फसलों में खरीफ, लेट खरीफ और रबी शामिल हैं। रबी प्याज की खेती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है और इसकी फसल सर्दियों के मौसम में तैयार होती है।

अलग-अलग सीजन में उत्पादन होने का फायदा यह है कि बाजार में प्याज की सप्लाई केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहती। महाराष्ट्र के किसानों के लिए यही कृषि चक्र राज्य को देश के बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्रों में बनाए रखने में मदद करता है।

सिर्फ खेत नहीं, मंडी का नेटवर्क भी बड़ा कारण

महाराष्ट्र की ताकत केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। यहां प्याज के लिए लंबे समय से विकसित व्यापार और मंडी नेटवर्क भी है।

नासिक जिले का लासलगांव प्याज कारोबार का बड़ा केंद्र है और इसे एशिया की प्रमुख प्याज मंडियों में गिना जाता है। यहां बड़ी मात्रा में प्याज की खरीद-बिक्री होती है और कीमतों का असर देश के दूसरे बाजारों तक भी पहुंचता है।

महाराष्ट्र के किसानों ने खेती के साथ प्याज की छंटाई, भंडारण और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था भी विकसित की है। यही कारण है कि यहां पैदा होने वाला प्याज केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहता।

‘कांदा चाळ’ में महीनों तक प्याज रखने की व्यवस्था

महाराष्ट्र में प्याज के भंडारण की पारंपरिक व्यवस्था को ‘कांदा चाळ’ कहा जाता है। यह प्याज को हवा लगने देने वाली ऐसी संरचना होती है, जिसका इस्तेमाल फसल को कुछ समय तक सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।

रबी सीजन के प्याज को उचित परिस्थितियों में कई महीनों तक स्टोर किया जा सकता है। इससे किसानों को फसल कटते ही पूरा माल बाजार में उतारने की मजबूरी कम होती है।

भंडारण के साथ महाराष्ट्र का परिवहन नेटवर्क भी महत्वपूर्ण है। प्याज को राज्य की मंडियों से देश के अलग-अलग हिस्सों तक भेजा जाता है। उत्पादन, भंडारण और परिवहन की यह पूरी श्रृंखला महाराष्ट्र को प्याज के कारोबार में मजबूत स्थिति देती है।