9/11 Attack: हमले से पहले अमेरिका को मिली थी अल-कायदा की चेतावनी

11 सितंबर 2001 (9/11) को अमेरिका में हुए विनाशकारी आतंकी हमलों को लेकर एक ऐतिहासिक जानकारी सामने आई है। हमलों से महज कुछ दिन पहले ही अमेरिकी आतंकवाद-रोधी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रिचर्ड ए. क्लार्क ने अल-कायदा से पैदा होने वाले गंभीर और तत्काल खतरे की सीधी चेतावनी व्हाइट हाउस को दी थी।
सिचुएशन रूम की मीटिंग में उठी थी चिंता
हमलों से करीब एक हफ्ते पहले व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ओसामा बिन लादेन के आतंकवादी नेटवर्क से बढ़ते खतरे पर एक अहम बैठक हुई थी। इस दौरान रिचर्ड क्लार्क ने तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कोंडोलीज़ा राइस से सीधे सवाल किया था कि क्या अमेरिकी प्रशासन अल-कायदा के खतरे को वास्तव में गंभीरता से ले रहा है।
USS कोल हमले से मिला था स्पष्ट संकेत
अक्टूबर 2000 में यमन में USS कोल पर हुए बम हमले, जिसमें 17 अमेरिकी नाविक मारे गए थे, के बाद से ही क्लार्क अल-कायदा के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की वकालत कर रहे थे।
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जनवरी 2001 के अपने एक मेमो में उन्होंने अल-कायदा को एक बेहद संगठित और घातक संगठन बताया था।
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क्लार्क ने चेतावनी दी थी कि जवाबी कार्रवाई न होने से अल-कायदा और तालिबान का दुस्साहस बढ़ रहा है और वे मान सकते हैं कि अमेरिकियों पर हमले का कोई नतीजा नहीं भुगतना पड़ेगा।
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उन्होंने नीति-निर्माताओं से भविष्य की उस स्थिति पर विचार करने को कहा था जहां अल-कायदा के हमलों में सैकड़ों अमेरिकी मारे जाएं।
अफगानिस्तान रणनीति पर प्रशासन में था भारी मतभेद
क्लार्क ने पेंटागन और CIA की उस हिचकिचाहट की कड़ी आलोचना की थी, जिसके चलते वे अफगानिस्तान को आतंकवाद-रोधी नीति का मुख्य केंद्र बनाने से कतरा रहे थे। मीटिंग में इस बात पर बहस तो हुई कि अफगानिस्तान में प्रीडेटर सर्विलांस फ्लाइट्स कब फिर से शुरू की जाएं, लेकिन कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जा सका।
रणनीति बनने से पहले ही हो गया हमला
बाद में 9/11 आयोग के सामने कोंडोलीज़ा राइस ने स्वीकार किया कि क्लार्क की चेतावनियां बेहद महत्वपूर्ण थीं। क्लार्क का अनुमान था कि अमेरिकी एजेंसियों को अल-कायदा के खिलाफ प्रभावी रणनीति बनाने में सालों लग सकते हैं, लेकिन आतंकवादी समूह ने महज कुछ दिनों के भीतर ही हमला कर दिया, जिसने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।
