अमेरिका में सत्ता का संतुलन बदला, अब इजरायल को मिलेगी कम मदद?

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अजमल शाह
अजमल शाह

इस्राइल की सड़कों और सार्वजनिक बसों पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के साथ मिलकर ईरान पर हमले का बखान करने वाले पोस्टर अभी भी लगे हुए हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच गठबंधन की जमीनी हकीकत तेजी से बदल रही है।

अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनावों के ठीक बाद इस्राइल और अमेरिका के संबंधों में एक बड़ा मोड़ आ गया है। अमेरिकी मतदाताओं ने इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को चुना है, जो ईरान, गाजा और वेस्ट बैंक जैसे मुद्दों पर इस्राइल के खिलाफ अधिक सख्त रुख अपनाना चाहती है। इसके साथ ही, राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस्राइल को दी जाने वाली भारी-भरकम सैन्य मदद को रोकने का चौंकाने वाला ऐलान कर दिया है।

ट्रंप ने क्यों रोकी सैन्य मदद?

मंगलवार को अमेरिकी चुनावों में मतदान के दौरान ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि उन्होंने इस साल के अंत तक इस्राइल को दी जाने वाली 3.8 अरब डॉलर की वार्षिक अमेरिकी सैन्य सहायता को समाप्त करने पर नेतन्याहू के साथ सहमति जता दी है। ट्रंप ने इस फैसले को सीधे तौर पर अमेरिका के राजनीतिक मिजाज से जोड़ा है।

चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के खराब प्रदर्शन का आकलन करते हुए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने मतदाताओं को वापस लाने के लिए चार तरीके सुझाए थे, जिनमें ईरान युद्ध को खत्म करना और “इस्राइल के साथ हमारे संबंधों में बदलाव” शामिल था। ट्रंप ने उनके इस आकलन से असहमति नहीं जताई।

नेतन्याहू की बढ़ रही है अलगाव की चिंता

इस्राइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू ने चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप के समर्थन की पुरजोर कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने अपने देश के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अलगाव को भी स्वीकार किया है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में नेतन्याहू ने सुझाव दिया था कि संभावित अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्राइल को क्रिप्टोकरेंसी का रुख करना चाहिए।

हालांकि, नेतन्याहू ने अमेरिकी चुनाव के नतीजों या सैन्य मदद रोकने संबंधी ट्रंप के बयानों पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। उनके करीबी माने जाने वाले पत्रकार अमित सहगल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका की राजनीतिक स्थिति इस्राइल के लिए एक “विनाशकारी” संकेत है।

क्या विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट गठबंधन बचा पाएंगे?

इन बदलती परिस्थितियों के बीच इस्राइल में विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट (Gadi Eisenkot) नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने के लिए गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आइजेनकोट खुद को इस्राइल-अमेरिका संबंधों को सुधारने वाले नेता के रूप में पेश कर रहे हैं।

उन्होंने एक बयान में कहा कि वह “उदारवादी मूल्यों” में विश्वास करते हैं और ट्रंप के साथ “करीबी और रचनात्मक” तरीके से काम करना चाहते हैं। आइजेनकोट के गठबंधन में मुख्य वामपंथी नेता यायर गोलन ने नेतन्याहू पर “शाश्वत युद्ध और सत्तावादी शासन का विनाशकारी नैरेटिव” गढ़ने का आरोप लगाते हुए, द्विदलीय दृष्टिकोण को बहाल करने का आह्वान किया।

‘अमेरिका के साथ संबंधों में आ रही है दरार’

इस्राइली थिंक टैंक ‘इकोनॉमिक कोऑपरेशन फाउंडेशन’ के वरिष्ठ नीति निदेशक एली कोवाज़ का मानना है कि नेतन्याहू ने सिर्फ रिपब्लिकन पार्टी पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से ट्रंप पर दांव लगाया था, जो अब खत्म हो गया है। कोवाज़ ने कहा, “यह पहली बार है जब वास्तव में यह महसूस किया जा रहा है कि समस्या सिर्फ डेमोक्रेट्स के साथ नहीं है, बल्कि अमेरिका के साथ संबंधों में आ गई है।”

सैन्य मदद छिनने पर इस्राइल का क्या होगा?

इस्राइली रक्षा मंत्रालय के पूर्व शोधकर्ता एहुद इलम के मुताबिक, अमेरिकी सहायता के बिना भी इस्राइल के पास अपना बड़ा हथियार उद्योग है और हमास-हिजबुल्लाह जैसे गुटों से लड़ने की क्षमता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी मदद के बिना इस्राइल को सस्ते और कम तकनीक वाले बमों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे आम नागरिकों के हताहत होने का जोखिम और बढ़ेगा, जो पहले से ही अंतरराष्ट्रीय आलोचना का कारण बना हुआ है। इलम ने कहा, “इस्राइल अमेरिकी सैन्य सहायता खोने की नई रणनीतिक वास्तविकता के साथ सामंजस्य बिठा सकता है, लेकिन इसके लिए उसे भारी कर्ज लेने या कर बढ़ाने जैसे कड़े फैसले लेने होंगे।”