होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका का बड़ा ऑपरेशन: 18 मिलियन बैरल तेल सुरक्षित निकाला

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) पर अपना दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी नौसेना ने एक व्यापक सुरक्षा अभियान चलाकर 18 मिलियन बैरल कच्चे तेल से लदे 40 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाया है। युद्ध शुरू होने के बाद से एक ही दिन में इस जलडमरूमध्य से तेल की सुरक्षित निकासी का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके साथ ही अमेरिकी सेना ने होर्मुज के तटीय इलाकों में बने ईरान के 60 महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की है।

परमाणु कार्यक्रम के बजाय होर्मुज पर अमेरिकी फोकस

अमेरिकी सैन्य विश्लेषकों का आकलन है कि ईरान के परमाणु ठिकानों के बजाय होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हासिल करना तेहरान पर रणनीतिक बढ़त लेने की असली कुंजी है। युद्ध शुरू होने से पहले इस संकरे समुद्री मार्ग से रोजाना करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता था। अमेरिका का ताजा ऑपरेशन यह दर्शाता है कि अब उसका प्राथमिक ध्यान होर्मुज की सप्लाई चेन को अपने नियंत्रण में लेने पर केंद्रित हो चुका है, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर ईरान के दबाव को बेअसर किया जा सके।

60 ईरानी ठिकानों पर सटीक हमले, रडार और एयर डिफेंस निष्क्रिय

वाशिंगटन के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी वायु और नौसैनिक बलों ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर 60 हमले किए।

  • रडार और संचार केंद्र: हमलों का मुख्य निशाना ईरानी एयर डिफेंस साइट्स और रडार स्टेशन रहे, जिससे ईरानी सेना की निगरानी प्रणाली ठप पड़ गई।

  • मिसाइल व माइंस क्षमताएं: अमेरिकी सेना ने समुद्र में माइंस बिछाने वाले अड्डों और एंटी-शिप क्रूज मिसाइल लॉन्च पैड्स को नष्ट करने का दावा किया है।

  • ड्रोन खतरे का खात्मा: ऑपरेशन के दौरान व्यापारिक जहाजों की तरफ बढ़े ईरानी ड्रोनों का भी मुकाबला कर उन्हें मार गिराया गया।

ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और ‘व्हैक-ए-मोल’ रणनीति

ट्रंप प्रशासन ने साफ किया है कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी बदस्तूर जारी है। इस कड़े प्रतिबंध के चलते जुलाई से ही ईरान का कच्चा तेल निर्यात पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।

अधिकारियों का कहना है कि ईरान अपनी सैन्य और तटीय क्षमताओं को बार-बार फिर से तैयार करने की कोशिश करता है, इसलिए अमेरिकी सेना को भी लगातार हमले करने पड़ रहे हैं। अधिकारियों ने इस निरंतर सैन्य कार्रवाई की तुलना ‘व्हैक-ए-मोल’ या घास काटने जैसी प्रक्रिया से की है, जहां किसी भी उभरते खतरे को सिर उठाते ही कुचलना जरूरी होता है। ट्रंप ने दावा किया कि रडार स्टेशनों के ध्वस्त होने के बाद अब ईरानी सेना व्यापारिक जहाजों की ट्रैकिंग करने की स्थिति में नहीं है।

शिपिंग कंपनियों में हिचक और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें

होर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण के अमेरिकी दावों के बाद भी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग में अभी पूरी तरह विश्वास बहाल नहीं हुआ है। समुद्री जोखिम बना रहने के चलते जहाजों का बीमा प्रीमियम काफी महंगा है और जहाजों को किराये पर लेने की लागत में भारी उछाल आया है। यही वजह है कि व्यापारिक जहाजों के ऑपरेटर अभी भी इस रूट पर सावधानी बरत रहे हैं, जिसके कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।