यूपी में जमीन का भू-उपयोग बदलना आसान, मेरठ में 16 हजार भवनों का सर्वे

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण और बिना नक्शा पास कराए व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच राज्य सरकार ने एक अहम नीतिगत कदम उठाया है। शासन ने मास्टर प्लान के तहत भू-उपयोग (Land Use) बदलने की प्रक्रिया को काफी सस्ता और सुलभ कर दिया है। इस फैसले से आवासीय क्षेत्रों में बिना नक्शे के व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने शहर के ए-जोन में 16 हजार से अधिक भवनों का नए सिरे से सर्वे शुरू कर दिया है।

भू-उपयोग परिवर्तन नियमावली में अहम संशोधन

उत्तर प्रदेश सरकार के आवास विभाग ने ‘उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क निर्धारण) नियमावली’ में बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब लोग बेहद कम शुल्क चुकाकर अपनी जमीन का भू-उपयोग बदलवा सकेंगे।

कृषि भूमि को आसानी से आवासीय, औद्योगिक, व्यावसायिक, कार्यालयीन या मिश्रित श्रेणी में बदला जा सकेगा। इसके अलावा आवासीय भूमि को व्यावसायिक में परिवर्तित कराने की सुविधा भी दी गई है, बशर्ते संबंधित सड़क की चौड़ाई निर्धारित मानकों को पूरा करती हो। प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरण अपनी आगामी बोर्ड बैठकों में इस नियमावली को पास कराकर जल्द लागू करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मेरठ के A-जोन में उतरी टीमें

मेरठ में अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद मेडा ने ए-जोन का री-सर्वे शुरू कर दिया है। मेडा वीसी ने छुट्टी से लौटते ही प्रवर्तन अधिकारियों के साथ बैठक कर सोमवार से इंजीनियरों और कर्मचारियों की टीमों को धरातल पर उतारने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान के तहत भवनों के वास्तविक और भौतिक रिकॉर्ड का बारीकी से मिलान किया जा रहा है।

मेडा की स्थापना से पहले के निर्माणों की बनेगी अलग सूची

री-सर्वे की प्रक्रिया में भवनों के निर्माण के समय को ध्यान में रखा जा रहा है। प्राधिकरण मेडा की स्थापना से पूर्व बने भवनों की एक अलग सूची तैयार करेगा। वहीं, प्राधिकरण की स्थापना के बाद हुए निर्माणों के स्वामियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा ताकि किसी भी कार्रवाई से पहले वैधानिक स्थिति स्पष्ट हो सके।

16,726 अवैध निर्माणों की सूची को बनाया गया आधार

मेडा ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में 16,726 ऐसे निर्माणों की सूची सौंपी थी, जिनके पास स्वीकृत नक्शा नहीं था या जहां आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। अब इसी सूची को आधार मानकर दोबारा मौका मुआयना किया जा रहा है। प्राधिकरण अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि री-सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने और भवनों की वैधानिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद ही नियमानुसार सीलिंग या नोटिस देने की अगली कार्रवाई की जाएगी।