नाथ नगरी की 9 सीटें, BJP का 9-0 रिकॉर्ड… अब 2027 में किसकी नजर?

पूर्वी उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक केंद्र में बसा गोरखपुर केवल अपनी विश्वप्रसिद्ध गीता प्रेस, टेराकोटा शिल्प और महायोगी गुरु गोरखनाथ की पवित्र तपोभूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला यूपी की सियासत में ‘सत्ता का सिरमौर’ तय करने वाला सबसे शक्तिशाली गढ़ माना जाता है। जहां अन्य जिले अपने क्षेत्रीय प्रभाव के लिए पहचाने जाते हैं, वहीं गोरखपुर को समूचे पूर्वांचल की राजनीतिक दिशा तय करने और राज्य की सत्ता के सबसे बड़े केंद्र होने का गौरव प्राप्त है।
मुंशी प्रेमचंद की यह कर्मभूमि और संतों-क्रांतिकारियों की माटी हमेशा से प्रदेश के राजनीतिक तापमान को तय करती आई है। 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील इस जिले में सभी प्रमुख दलों ने अपनी शतरंजी बिसात बिछानी शुरू कर दी है।
सामाजिक ढांचा और आबादी का गणित
2011 की जनगणना के अनुसार, गोरखपुर जिले की कुल आबादी करीब 44,40,895 है।
| विवरण | कुल | पुरुष | महिला |
| जनसंख्या | 44,40,895 | 22,77,777 | 21,63,118 |
| साक्षरता दर | 70.83% | 81.80% | 59.36% |
धार्मिक ताना-बाना:
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हिंदू: 90.28%
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मुस्लिम: 9.09%
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अन्य (ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन): 0.63%
जिले में सवर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, कायस्थ, वैश्य), पिछड़ा वर्ग (खासकर निषाद, यादव, सैंथवार, मौर्य) और अनुसूचित जाति (दलित) का मजबूत सामाजिक मिश्रण है। नाथ पीठ (गोरखनाथ मंदिर) का सर्वसमावेशी प्रभाव और सामाजिक संतुलन यहां के चुनावी नतीजों की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।
2022 के नतीजे: सभी 9 सीटों पर खिला था कमल
2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने गोरखपुर जिले में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सभी 9 सीटों पर क्लीन स्वीप किया था:
| क्र.सं. | विधानसभा सीट | विजयी उम्मीदवार | पार्टी | मुख्य प्रतिद्वंद्वी (रनर-अप) |
| 1 | कैम्पियरगंज (320) | फतेह बहादुर सिंह | भाजपा | काजल निषाद (सपा) |
| 2 | पिपराइच (321) | महेंद्र पाल सिंह | भाजपा | अमरेंद्र निषाद (सपा) |
| 3 | गोरखपुर शहर (322) | योगी आदित्यनाथ | भाजपा | सुभावती उपेन्द्र दत्त शुक्ला (सपा) |
| 4 | गोरखपुर ग्रामीण (323) | बिपिन सिंह | भाजपा | विजय बहादुर यादव (सपा) |
| 5 | सहजनवा (324) | प्रदीप शुक्ला | भाजपा | यशपाल रावत (सपा) |
| 6 | खजनी (SC – 325) | श्रीराम चौहान | भाजपा | रूपवती (सपा) |
| 7 | चौरी-चौरा (326) | श्रवण कुमार निषाद | भाजपा | बृजेश चंद्र लाल (सपा) |
| 8 | बांसगांव (SC – 327) | विमलेश पासवान | भाजपा | डॉ. संजय कुमार (सपा/कांग्रेस) |
| 9 | चिल्लूपार (328) | राजेश त्रिपाठी | भाजपा | विनय शंकर तिवारी (सपा) |
सभी 9 सीटों का जमीनी विश्लेषण
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गोरखपुर शहर: यह पूरे प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट है, जहां से खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधायक हैं। गोरखनाथ पीठ का सीधा प्रभाव होने के कारण यह सीट दशकों से भाजपा का अभेद्य दुर्ग बनी हुई है।
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चिल्लूपार: यह सीट कभी पूर्वांचल के कद्दावर नेता स्वर्गीय हरिशंकर तिवारी का सबसे मजबूत किला मानी जाती थी और जिले में गैर-भाजपा राजनीति की धुरी थी। 2022 में भाजपा के राजेश त्रिपाठी ने हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी को हराकर इस किले पर भगवा फहराया।
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कैम्पियरगंज: नेपाल सीमा के मार्ग पर स्थित यह विधानसभा क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के परिवार का प्रभाव क्षेत्र रहा है। यहां से भाजपा के फतेह बहादुर सिंह लगातार जीतते आ रहे हैं।
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पिपराइच: कृषि और चीनी मिल क्षेत्र के लिए पहचानी जाने वाली इस सीट पर 2022 में भाजपा के महेंद्र पाल सिंह ने सपा के अमरेंद्र निषाद को शिकस्त दी थी।
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गोरखपुर ग्रामीण: शहर से सटी इस सीट पर शहरी और ग्रामीण दोनों मतदाताओं का मिला-जुला प्रभाव है। निषाद और यादव मतदाताओं की बहुलता वाली इस सीट पर 2022 में भाजपा के बिपिन सिंह ने कड़े मुकाबले में जीत हासिल की थी।
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सहजनवा: गीडा (GIDA) औद्योगिक क्षेत्र के कारण यह विकास और व्यापार के लिहाज से अहम सीट है। 2022 में यहां से भाजपा के प्रदीप शुक्ला विजयी रहे।
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खजनी (सुरक्षित): अनुसूचित जाति बहुल इस सीट पर भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री श्रीराम चौहान को उतारकर जीत दर्ज की थी।
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चौरी-चौरा: 1922 के ऐतिहासिक स्वतंत्रता आंदोलन के लिए मशहूर इस सीट पर पिछड़ा और निषाद समुदाय काफी प्रभावी है, जहां से भाजपा के श्रवण कुमार निषाद विधायक हैं।
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बांसगांव (सुरक्षित): यह सुरक्षित सीट बांसगांव लोकसभा का हिस्सा है। यहां से भाजपा के विमलेश पासवान का परिवार लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय है।
स्थानीय मुद्दे और 2027 की सियासी जंग
गोरखपुर में चुनावी लड़ाई हमेशा विकास और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती है:
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उद्योग और रोजगार: गीडा (GIDA) में नए औद्योगिक निवेश, प्लास्टिक पार्क और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का मुद्दा।
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स्वास्थ्य सेवाएं: एम्स (AIIMS) और बीआरडी मेडिकल कॉलेज का विस्तार और सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण।
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बाढ़ व जलजमाव: राप्ती और रोहिन नदियों के कछार में ग्रामीण इलाकों को बाढ़ से सुरक्षा और तटबंधों का रखरखाव।
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स्थानीय हुनर को बढ़ावा: विश्वप्रसिद्ध टेराकोटा शिल्प को ओडीओपी (ODOP) के तहत वैश्विक बाजार और कारीगरों को बेहतर सहूलियतें।
2027 के चुनाव में जहां भाजपा अपने विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र के प्रभाव के दम पर दोबारा क्लीन स्वीप का लक्ष्य लेकर उतरेगी, वहीं समाजवादी पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन निषाद, यादव और दलित मतदाताओं को लामबंद कर भाजपा के इस मजबूत किले में सेंध लगाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।

