RLD-BJP साथ आए तो बागपत की 3 सीटों पर कितना बदलेगा समीकरण?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में सियासी हलचल तेज हो चुकी है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) का गढ़ माने जाने वाले बागपत जिले पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं। महाभारत कालीन मान्यताओं के अनुसार बागपत को प्राचीन समय में ‘व्याघ्रप्रस्थ’ (बाघों की भूमि) कहा जाता था। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद तहसील मुख्यालय बना यह शहर आज पश्चिमी यूपी की राजनीति की धुरी माना जाता है।
जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें आती हैं—छपरौली (50), बड़ौत (51) और बागपत (52)। जिले के सामाजिक ताने-बाने में जाट मतदाता बहुसंख्यक और निर्णायक भूमिका में हैं, जबकि मुस्लिम, त्यागी, ब्राह्मण और गुर्जर मतदाता भी परिणाम तय करने में बड़ा प्रभाव रखते हैं।
2022 के चुनावी नतीजे: कहीं एकतरफा जीत, तो कहीं 315 वोटों का रोमांच
2022 के विधानसभा चुनाव में RLD और समाजवादी पार्टी (SP) मिलकर चुनाव लड़े थे, जबकि भाजपा अपने दम पर मैदान में थी। जिले की तीनों सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा था:
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1. छपरौली (सीट संख्या-50): छपरौली सीट को RLD का सबसे मजबूत किला माना जाता है। 2022 में सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी अजय कुमार तोमर ने 1,11,880 वोट (53.30%) हासिल कर भाजपा के सहेंद्र सिंह रमाला को 29,508 वोटों के भारी अंतर से हराया था। सहेंद्र रमाला को 82,372 वोट मिले थे, जबकि बसपा प्रत्याशी को 9,774 वोट मिले।
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2. बड़ौत (सीट संख्या-51): इस सीट पर पूरे प्रदेश का सबसे नजदीकी मुकाबला देखने को मिला था। भाजपा के कृष्णपाल मलिक ने महज 315 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी। कृष्णपाल मलिक को 90,931 वोट (46.34%) मिले, जबकि RLD के जयवीर सिंह तोमर को 90,616 वोट (46.18%) हासिल हुए। बसपा के अंकित शर्मा 11,244 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे।
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3. बागपत (सीट संख्या-52): सदर सीट पर भाजपा के योगेश धामा ने जीत का परचम लहराया था। उन्होंने RLD प्रत्याशी मोहम्मद अहमद हमीद को 6,733 वोटों से हराया। योगेश धामा को 1,01,420 वोट (47.50%) और अहमद हमीद को 94,687 वोट (44.34%) मिले थे।
RLD के NDA में आने से बदला पूरा राजनीतिक परिदृश्य
2022 के मुकाबले 2027 के चुनावी समीकरण पूरी तरह पलट चुके हैं। 2022 में भाजपा और RLD एक-दूसरे के आमने-सामने ताल ठोक रहे थे, लेकिन अब जयंत चौधरी की RLD केंद्र व राज्य में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का प्रमुख हिस्सा है। वहीं दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के तहत मिलकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
गठबंधन के इस नए स्वरूप से बागपत की तीनों सीटों पर आंतरिक और बाहरी समीकरण काफी दिलचस्प हो गए हैं:
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सीट बंटवारे की चुनौती: बड़ौत और बागपत दोनों सीटों पर 2022 में भाजपा ने जीत दर्ज की थी, लेकिन दोनों ही सीटों पर RLD का वोट शेयर 44 से 46 प्रतिशत के बीच रहा था। ऐसे में NDA के भीतर इन दोनों सीटों पर भाजपा और RLD में से कौन सा दल प्रत्याशी उतारेगा, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
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छपरौली का पारंपरिक प्रभाव: छपरौली सीट RLD का पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी NDA गठबंधन को यहां बढ़त मिली थी, जिससे RLD इस सीट पर स्वाभाविक रूप से अपना पहला दावा रखेगी।
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सपा-कांग्रेस गठबंधन की नजर: मुस्लिम-जाट बहुल इस क्षेत्र में सपा-कांग्रेस गठबंधन ‘पीडीए’ और विपक्षी वोटों को एकजुट कर NDA को कड़ी टक्कर देने की रणनीति बना रहा है।
2027 के महासमर में बागपत की यह सियासी लड़ाई मुख्य रूप से भाजपा-RLD गठबंधन बनाम सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच सिमटने के पूरे आसार हैं। हालांकि, सीटों का असली रोमांच टिकट वितरण और प्रत्याशियों के नामों के ऐलान के बाद ही सामने आएगा।

