Uganda: हर घंटे 4 नए HIV संक्रमण, UAC के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

युगांडा एड्स आयोग (Uganda AIDS Commission – UAC) द्वारा पेश किए गए 2025 के आंकड़ों ने देश में एचआईवी (HIV) संक्रमण की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, युगांडा में हर घंटे कम से कम चार लोग एचआईवी संक्रमण का शिकार हो रहे हैं।

UAC के प्रमुख सांख्यिकीविद् ब्रायन मासिम्बी ने किगेजी क्षेत्र के रुकुंगिरी नगर पालिका में मीडिया कर्मियों के लिए आयोजित एक जागरूकता कार्यशाला के दौरान ये चिंताजनक आंकड़े पेश किए।

2025 की रिपोर्ट के डराने वाले आंकड़े

रिपोर्ट के अनुसार युगांडा में एचआईवी संक्रमण और इससे होने वाली मौतों की स्थिति बेहद गंभीर है:

  • नए संक्रमण: 2025 में युगांडा में लगभग 34,400 नए एचआईवी मामले दर्ज किए गए। इसका सीधा अर्थ है कि औसतन हर घंटे 4 या हर हफ्ते लगभग 662 लोग संक्रमित हो रहे हैं।

  • संक्रमितों की कुल संख्या: देश में वर्तमान में लगभग 15.5 लाख लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं। इनमें 9,80,000 महिलाएं, 5,69,000 पुरुष और 71,000 बच्चे शामिल हैं।

  • मृत्यु दर: एचआईवी से जुड़ी बीमारियों के कारण हर साल करीब 19,000 लोगों की मौत हो रही है (प्रतिदिन औसतन 54 या प्रति सप्ताह 384 मौतें)। रिपोर्ट के मुताबिक, एचआईवी से मरने वालों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या अधिक है।

  • युवा महिलाओं पर सबसे ज्यादा खतरा: नए एचआईवी संक्रमणों में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी युवाओं की है। इसमें भी युवा महिलाओं की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जो युवाओं में होने वाले कुल संक्रमण का 80 प्रतिशत हैं।

प्रसार दर (Prevalence Rate) और प्रभावित क्षेत्र

आंकड़ों के अनुसार, 2025 में युगांडा में एचआईवी का कुल प्रसार 4.9 प्रतिशत आंका गया है। किगेजी क्षेत्र के भीतर रुकुंगिरी में यह दर सबसे अधिक 8.1 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद कनुंगु में 6%, कबाले में 5%, रुकिगा में 4.3%, रुबांडा में 2.6% और किसोरो में प्रसार दर 2% दर्ज की गई।

क्यों तेजी से फैल रहा है संक्रमण?

ब्रायन मासिम्बी ने एचआईवी संक्रमण के लगातार प्रसार के लिए कई व्यवहारिक और सामाजिक कारकों को जिम्मेदार ठहराया है:

  • एक से अधिक यौन साथी होना और अपनी एचआईवी स्थिति को छिपाना।

  • कंडोम का कम उपयोग और लेन-देन वाला सेक्स (Transactional sex)।

  • शराब और नशीली दवाओं का अत्यधिक सेवन।

  • एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (ART) की आसान पहुंच के कारण लोगों के भीतर बीमारी को लेकर पैदा हुई लापरवाही।

  • इसके अलावा, देश में व्याप्त गरीबी, धन की असमानता और लैंगिक भेदभाव भी संक्रमण को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।