High Court Judges: 4 कोर्ट के 12 अतिरिक्त जज स्थायी होंगे, देखें पूरी लिस्ट

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अजमल शाह
अजमल शाह

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने देश के चार उच्च न्यायालयों में कार्यरत 12 अतिरिक्त जजों (Additional Judges) को स्थायी जज (Permanent Judges) के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश को अपनी मंजूरी दे दी है। 23 सितंबर को हुई कॉलेजियम की अहम बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस फैसले के दायरे में गौहाटी, उत्तराखंड, केरल और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज शामिल हैं।

किन हाईकोर्ट्स के जजों के नामों पर लगी मुहर?

कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित 12 जजों में सबसे अधिक 5-5 जज केरल और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से हैं, जबकि गौहाटी और उत्तराखंड हाईकोर्ट से 1-1 जज का नाम शामिल है।

केरल हाईकोर्ट (5 जज): केरल हाईकोर्ट से जिन पांच अतिरिक्त जजों को स्थायी नियुक्ति देने की सिफारिश की गई है, वे हैं:

  1. जस्टिस पी. कृष्ण कुमार

  2. जस्टिस के.वी. जयकुमार

  3. जस्टिस मुरली कृष्ण एस.

  4. जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन

  5. जस्टिस पी.वी. बालकृष्णन

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (5 जज): आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से भी पांच जजों के नामों को स्थायी नियुक्ति के लिए मंजूर किया गया है:

  1. जस्टिस महेश्वर राव कुंचम

  2. जस्टिस थूटा चंद्र धना सेकर

  3. जस्टिस चल्ला गुणरंजन

  4. जस्टिस अवधनम हरि हरनाथ शर्मा

  5. डॉ. जस्टिस यदवल्ली लक्ष्मण राव

उत्तराखंड और गौहाटी हाईकोर्ट (1-1 जज):

  • उत्तराखंड हाईकोर्ट: अतिरिक्त जज के तौर पर कार्यरत जस्टिस सुभाष उपाध्याय को स्थायी जज बनाने की सिफारिश की गई है।

  • गौहाटी हाईकोर्ट: जस्टिस कौशिक गोस्वामी को स्थायी जज के रूप में नियुक्ति की हरी झंडी दी गई है।

क्या है अतिरिक्त जजों को स्थायी करने की प्रक्रिया?

संविधान की न्यायिक व्यवस्था के तहत, उच्च न्यायालयों में ‘अतिरिक्त जज’ के रूप में नियुक्ति शुरुआत में एक तय अवधि (आमतौर पर दो वर्ष) के लिए होती है। इस अवधि के दौरान उनके कामकाज, फैसलों की गुणवत्ता और अन्य जरूरी पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है।

संबंधित हाईकोर्ट द्वारा उनके कामकाज की रिपोर्ट कॉलेजियम को भेजी जाती है। कॉलेजियम से हरी झंडी मिलने के बाद ही स्थायी नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

संवैधानिक प्रावधान:

  • हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और स्थायी जजों की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  • वहीं, अतिरिक्त जजों की प्रारंभिक नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 224 के तहत होती है।

कॉलेजियम की इस सिफारिश के बाद, अब इन 12 जजों के स्थायीकरण की फाइलें कानून मंत्रालय के जरिए राष्ट्रपति के पास अंतिम मुहर के लिए भेजी जाएंगी।