दिल्ली को जाम न करें, इंटरनेट भी बाधित न हो! सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी दिल्ली में लगाई गई कड़ी पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। रविवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरी दिल्ली से तुरंत बैरिकेडिंग हटाई जाए, इंटरनेट सेवाएं बहाल की जाएं और मेट्रो का संचालन अपनी सामान्य समय-सारिणी के अनुसार किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में मेट्रो सेवाएं बाधित करने और विपक्षी नेताओं की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी।

‘जब बहुत जरूरत हो, तभी लगे बैरिकेड’

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शहर भर में लगाए गए बैरिकेड्स तुरंत हटा दिए जाने चाहिए। इनका इस्तेमाल केवल तभी किया जाए, जब इसकी अत्यधिक आवश्यकता हो। बेंच ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में कहीं भी इंटरनेट बंद नहीं किया जाना चाहिए और सेवाएं तुरंत सामान्य की जाएं।

अदालत ने लोगों की आवाजाही को भी सामान्य करने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि ये सभी छूट कानून-व्यवस्था (आर्टिकल 19(2) के तहत) की स्थिति पर निर्भर करेंगी। अदालत ने माना कि कानून-व्यवस्था सही रहनी चाहिए और अगर स्थिति बिगड़ती है, तो प्रशासन पाबंदियों वाले फैसले ले सकता है।

मेट्रो स्टेशनों की बंदी पर सवाल, तुषार मेहता ने दिया जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो के संचालन में हुई रुकावट पर सवाल खड़े किए। बेंच ने कहा कि हमने पहले भी कहा था कि मेट्रो के संचालन पर रोक न लगे। आपने 57 स्टेशनों की बजाय 45 को ही बंद किया, लेकिन स्टेशन तो बंद रहे।

इस पर सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कुल 303 स्टेशनों में से सिर्फ 45 मेट्रो स्टेशन ही बंद किए गए थे। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि अब सभी स्टेशन खुले हैं और मेट्रो का संचालन सुचारू रूप से चल रहा है।

अवमानना मामले में अधिकारियों से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो और ट्रेनें निरस्त करने को लेकर दायर अवमानना (Contempt) याचिका पर भी सुनवाई की। यह याचिका केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो की चेयरपर्सन डी थारा के खिलाफ लगाई गई है।

कोर्ट ने अवमानना के इस मामले में कहा, “हमने आपकी दलील देख ली है। हम यह प्रस्ताव रखते हैं कि राज्य और जिन पर अवमानना का आरोप है, उनसे याचिका और स्टेटस रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने को कहा जाए।” इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो से शहर का नक्शा (Map) भी मांगा है और दोहराया है कि मेट्रो सेवाएं अपने सामान्य शेड्यूल पर ही चलनी चाहिए।

सीजेपी के इस प्रदर्शन से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की गई है। इस दूसरी याचिका में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी गई है।