CJI विवाद में संजय राउत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जानिए 17 तारीख का मामला

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ विवादित टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राउत को 17 नवंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा दायर इस अवमानना याचिका में पत्रकार निखिल वागले को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने को कहा गया है।
जवाब दाखिल न करने पर अदालत ने किया तलब
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत और निखिल वागले को नोटिस जारी किया था। उस समय अदालत ने दोनों को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी थी। ताजा सुनवाई में पत्रकार वागले की तरफ से माफीनामा दाखिल किया गया और उनके वकील भी अदालत में पेश हुए। इसके विपरीत, अदालत के रिकॉर्ड में संजय राउत का जवाब और उनके वकील का वकालतनामा मौजूद नहीं था। कानूनी प्रक्रिया का पालन न होने पर अदालत ने राउत को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
क्या था CJI से जुड़ा विवाद?
संजय राउत ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर (SIR) के मुद्दे पर ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं से CJI सूर्यकांत के न मिलने पर सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी। सांसद ने आरोप लगाया था कि जज राजनीतिक हस्तियों के साथ लंदन में बैडमिंटन खेलते हैं और राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। इस दावे पर अटॉर्नी जनरल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया था कि राउत जिस तस्वीर का जिक्र कर रहे हैं, वह लंदन की नहीं बल्कि दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम की है।
SCBA ने दायर की आपराधिक अवमानना याचिका
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने इस पूरे प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जयमालिया बागची की पीठ ने सख्त टिप्पणी की थी। पीठ ने कहा था कि संवैधानिक संस्थानों पर इस तरह के हमले अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं और पूछा था कि इन बयानों के आधार पर अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। 17 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई में राउत को अब अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा।

