सैनिक स्कूल एडमिशन में होने वाला है बदलाव? जानिए रक्षा मंत्रालय की तैयारी

देशभर के सैनिक स्कूलों (Sainik Schools) में पढ़ाई कर सेना में अफसर बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए एक अच्छी खबर है। रक्षा मंत्रालय सैनिक स्कूलों में दाखिले के नियमों में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। नई योजना के तहत अब सिर्फ छठी और नौवीं कक्षा के बजाय, हर क्लास की खाली सीटों पर हर साल नए एडमिशन दिए जा सकेंगे। सैनिक स्कूलों में दाखिले की भारी मांग और बीच में पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉप आउट) वाले छात्रों की संख्या को देखते हुए मंत्रालय इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
7 फीसदी छात्र बीच में छोड़ देते हैं पढ़ाई
रक्षा मंत्रालय के एक आधिकारिक डॉक्यूमेंट के अनुसार, सैनिक स्कूलों में दाखिला लेने वाले कुल विद्यार्थियों में से करीब 7 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी कारण से अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं।
इसके पीछे कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आई हैं। कम उम्र में पहली बार परिवार से दूर हॉस्टल में रहना बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इसके अलावा सैनिक स्कूलों के कड़े नियम, सख्त दिनचर्या, हॉस्टल के माहौल में खुद को ढालने में आने वाली दिक्कतें और मेडिकल कारणों से कड़ा शारीरिक अभ्यास (Physical Practice) जारी न रख पाना पढ़ाई छोड़ने की मुख्य वजहें हैं।
सालों तक क्यों खाली रह जाती हैं सीटें?
मौजूदा नियमों के मुताबिक, सैनिक स्कूलों में नए एडमिशन का प्रावधान केवल कक्षा 6 और 9 में ही है। बीच की कक्षाओं में दाखिले का कोई नियम नहीं है।
इस व्यवस्था के कारण अगर कक्षा 6 में 100 विद्यार्थियों का एडमिशन होता है और कुछ महीनों बाद 7 छात्र स्कूल छोड़ देते हैं, तो वे 7 सीटें कक्षा 7 और 8 तक लगातार खाली पड़ी रहती हैं। इन खाली सीटों को भरने का अगला मौका सीधे कक्षा 9 में मिलता है। वहीं, अगर कोई छात्र कक्षा 9 या उसके बाद स्कूल छोड़ता है, तो उसकी सीट 12वीं तक यानी 3-4 सालों के लिए खाली रह जाती है। इस नियम के चलते हर साल हजारों मेधावी छात्र प्रवेश परीक्षा देने के बावजूद बाहर रह जाते हैं, जबकि क्लासरूम में सैकड़ों सीटें सालों खाली पड़ी रहती हैं।
संसदीय समिति की सिफारिश के बाद एक्शन
सीटों के इस तरह खाली रहने के मुद्दे पर हाल ही में रक्षा मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की थी। समिति ने सरकार से सिफारिश की थी कि ड्रॉप आउट के कारण खाली होने वाली सीटों को भरने के लिए तत्काल एक ठोस व्यवस्था बनाई जाए, जिससे अन्य योग्य और जरूरतमंद विद्यार्थियों को मौका मिल सके।
संसदीय समिति की इस सिफारिश के बाद रक्षा मंत्रालय सक्रिय हुआ है। अब ऐसे नए नियमों का खाका तैयार किया जा रहा है जिससे किसी भी कक्षा में सीट लंबे समय तक खाली न रहे और हर साल सभी कक्षाओं की बची हुई सीटों पर नए एडमिशन की अनुमति दी जा सके।

