विदेश से लौटा और एयरपोर्ट पर दबोचा गया! कौन है अख्तर मर्चेंट?

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

विदेश से भारत लौटना अख्तर मर्चेंट के लिए महज एक यात्रा नहीं, बल्कि गिरफ्तारी तक पहुंचने वाला आखिरी सफर साबित हुआ। 2023 के काशीमीरा बेकरी फायरिंग और रंगदारी मामले में वांछित चल रहे मर्चेंट को दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, वह करीब तीन साल से फरार था और उसके विदेश में होने की जानकारी इंटरपोल के जरिए जांच एजेंसियों तक पहुंची थी। भारत की सीमा में कदम रखते ही उसकी तलाश खत्म हो गई।

तीन साल से पुलिस की नजर से बाहर

अख्तर मर्चेंट पर मीरा-भाईंदर इलाके के काशीमीरा में 2023 में हुई बेकरी फायरिंग के मामले में आरोप है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में उस पर रंगदारी और फायरिंग से जुड़े गंभीर आरोप हैं। काशीमीरा पुलिस को उसकी तलाश थी, लेकिन वह गिरफ्तारी से बचता रहा। अब दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई कार्रवाई के बाद उसे मीरा-भाईंदर लाया जाएगा, जहां जांच आगे बढ़ेगी।

रंगदारी का दबाव, फिर बेकरी पर गोलीबारी

पुलिस की जांच के मुताबिक, मीरा रोड के काशीमीरा इलाके में गुटखा कारोबारी बाबू से रंगदारी मांगी गई थी। आरोप है कि रकम नहीं देने के बाद उसकी बेकरी को निशाना बनाकर फायरिंग की गई। इसी मामले में काशीमीरा पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 700/2023 दर्ज की गई थी। पुलिस ने हत्या के प्रयास, रंगदारी, आपराधिक साजिश और अन्य धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट तथा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून यानी MCOCA के तहत भी कार्रवाई की है।

पप्पू पेजर पहले ही पकड़ा जा चुका है

जांच एजेंसियों के अनुसार इस मामले में अख्तर मर्चेंट के साथ पप्पू पेजर की भी भूमिका सामने आई थी। क्राइम ब्रांच ने पप्पू पेजर को पिछले साल गिरफ्तार किया था, जबकि अख्तर मर्चेंट गिरफ्तारी से बचता रहा। जांच में कॉल और उसके बाद हुई फायरिंग को मामले की अहम कड़ियों के तौर पर देखा गया।

इंटरपोल इनपुट से दिल्ली तक पहुंची तलाश

पुलिस के मुताबिक, मीरा-भाईंदर वसई-विरार पुलिस की क्राइम ब्रांच को इंटरपोल के जरिए मर्चेंट के विदेश में होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद उसके भारत लौटने पर नजर रखी गई। जैसे ही वह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया।

अब पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज

अख्तर मर्चेंट को मीरा-भाईंदर लाए जाने के बाद पुलिस उससे पूछताछ करेगी। जांच एजेंसियों के सामने अब सिर्फ 2023 की फायरिंग की कड़ियां जोड़ने का सवाल नहीं है, बल्कि यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि फरारी के दौरान वह कहां रहा, किन लोगों के संपर्क में था और अपराध से जुड़े नेटवर्क में उसकी भूमिका क्या थी।

पुलिस अगर उसके विदेश में रहने, वित्तीय लेन-देन और अन्य आरोपियों से संपर्क की पुष्टि करती है, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। 

एयरपोर्ट पर खत्म हुआ तीन साल का इंतजार

तीन साल तक फरार रहे एक वांछित आरोपी की गिरफ्तारी ने काशीमीरा फायरिंग मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। अब जांच की अगली परीक्षा यह होगी कि पुलिस उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को किस तरह साक्ष्यों से जोड़ती है और रंगदारी, फायरिंग तथा संगठित अपराध के बीच संबंध को अदालत के सामने कितना मजबूत तरीके से साबित कर पाती है।

कहानी फिलहाल गिरफ्तारी पर खत्म नहीं हुई है। असली सवाल अब शुरू होता है: तीन साल की फरारी के दौरान अख्तर मर्चेंट कहां था, किसके संपर्क में था और 2023 की उस फायरिंग के पीछे पूरा नेटवर्क कितना बड़ा था?