जानिए कलिनिनग्राद पर पुतिन की परमाणु चेतावनी के पीछे क्या है पूरा विवाद

रूस और पश्चिमी देशों के बीच जारी तनाव के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) को कड़ी चेतावनी दी है। पुतिन ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि यदि मॉस्को को यह महसूस हुआ कि बाल्टिक क्षेत्र में स्थित उसके रणनीतिक एन्क्लेव ‘कैलिनिनग्राद’ (Kaliningrad) पर सीधा हमला हुआ है, तो रूस अपने शस्त्रागार में मौजूद सभी हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। इस बयान को रूस की ओर से पश्चिमी देशों को संभावित परमाणु कार्रवाई की सीधी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
‘हम किसी को धमकी नहीं दे रहे, पश्चिमी बयानों का दे रहे हैं जवाब’
पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि रूस किसी भी देश को सीधे तौर पर धमकी नहीं दे रहा है, बल्कि वह केवल पश्चिमी नेताओं के आक्रामक बयानों का जवाब दे रहा है।
उन्होंने पश्चिमी मुल्कों के उन दावों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा है कि रूस 2029 या 2030 तक व्यापक युद्ध छेड़ने की तैयारी कर रहा है। पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस की सैन्य नीति आत्मरक्षा और अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा पर आधारित है।
कैलिनिनग्राद की भौगोलिक संवेदनशीलता और नाकाबंदी का खतरा
कैलिनिनग्राद भौगोलिक दृष्टि से रूस की मुख्य भूमि से अलग, पूरी तरह से नाटो सदस्य देशों—पोलैंड और लिथुआनिया—के बीच घिरा हुआ है।
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इस पूरे सप्ताह मॉस्को ने आरोप लगाया है कि नाटो देश कैलिनिनग्राद की आर्थिक और सैन्य नाकाबंदी (Blockade) की योजना बना रहे हैं।
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रूस ने कड़े लहजे में आगाह किया है कि अगर पश्चिमी देशों ने कैलिनिनग्राद को रूस के बाकी हिस्सों से काटने या उसकी कनेक्टिविटी रोकने का प्रयास किया, तो वह स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परमाणु हथियारों (Nuclear Weapons) के इस्तेमाल से भी पीछे नहीं हटेगा।
नाटो का पलटवार: ‘परमाणु बयानबाजी बंद करे रूस’
रूसी राष्ट्रपति के इस तीखे बयान के बाद नाटो ने स्थिति को शांत करने की अपील की है। सैन्य गठबंधन ने दोहराया कि नाटो पूरी तरह से एक रक्षात्मक संगठन है और उसका किसी क्षेत्र पर कब्जा करने या हमला करने का कोई इरादा नहीं है। इसके साथ ही नाटो ने मॉस्को से गैर-जिम्मेदाराना “परमाणु बयानबाजी और धमकियां” तुरंत बंद करने का आग्रह किया है।
हाइब्रिड वॉरफेयर और हवाई घुसपैठ से बढ़ा तनाव
हाल के महीनों में पोलैंड और बाल्टिक देशों ने आरोप लगाया है कि उन्हें रूस द्वारा संचालित तथाकथित ‘हाइब्रिड युद्ध’ (Hybrid Warfare) का सामना करना पड़ रहा है।
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पिछले सप्ताह पोलैंड ने दावा किया था कि एक रूसी सैन्य हेलीकॉप्टर कैलिनिनग्राद सीमा से सटे उसके हवाई क्षेत्र में घुस आया था।
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वहीं, लिथुआनिया ने भी सुरक्षा चिंताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि उसकी सीमा में बार-बार संदिग्ध ड्रोनों के प्रवेश के कारण उसके नागरिक लगातार एक अदृश्य खतरे के साए में जीने को मजबूर हैं।
कैलिनिनग्राद को लेकर उपजे इस नए तनाव ने बाल्टिक सागर क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका को और गहरा कर दिया है।

