PM का अशोक सिंघल पर भावुक लेख, सिर्फ श्रद्धांजलि या UP 27 का संदेश?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व प्रमुख अशोक सिंघल की 100वीं जयंती पर एक विस्तृत लेख लिखा है। इसमें राम जन्मभूमि आंदोलन में सिंघल की भूमिका, 1991 की बोट क्लब रैली, सामाजिक समरसता के प्रयोगों और उनसे जुड़े निजी संस्मरणों का जिक्र किया गया है। सतह पर यह एक श्रद्धांजलि प्रतीत होती है, लेकिन इसके भीतर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
राम मंदिर को फिर से विमर्श के केंद्र में लाने की तैयारी
लेख में प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि आज अयोध्या में जो भव्य राम मंदिर खड़ा है, उसके पीछे अशोक सिंघल जैसी विभूतियों का कड़ा संघर्ष है। पीएम मोदी ने लिखा, “अगर अशोक जी आज होते तो सबसे ज्यादा भावुक होते।”
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि भाजपा की एक बड़ी भावनात्मक पूंजी है। 2027 के चुनाव नजदीक आते-आते पार्टी इस पूंजी को राम जन्मभूमि आंदोलन की निरंतरता और सिंघल के नाम के साथ जोड़कर फिर से उभारने की रणनीति पर काम कर रही है।
‘समरसता’ के जरिए दलित वोटों तक पहुंच का दांव
लेख का एक अहम हिस्सा कामेश्वर चौपाल और डोम राजा के जिक्र से जुड़ा है। राम मंदिर की पहली ईंट एक दलित कार्यकर्ता के हाथों रखवाने और काशी में डोम राजा को सम्मानित किए जाने की घटनाओं को मोदी ने सिंघल की समावेशी सोच के रूप में पेश किया है।
यूपी में समाजवादी पार्टी (SP) अपने ‘पीडीए’ (PDA) फॉर्मूले और बहुजन समाज पार्टी (BSP) अपने पारंपरिक आधार के जरिए दलित मतदाताओं को साधने में जुटी हैं। ऐसे में भाजपा के लिए यह जताना जरूरी है कि हिंदुत्व का ढांचा समावेशी है। समरसता की इन कहानियों के जरिए पार्टी अपने कोर वोटर को साधे रखने के साथ-साथ नए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है।
निजी संस्मरण और संगठन को एकजुट करने का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में 1981 के एक हस्तलिखित पत्र, गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों की यात्राओं और कच्छ भूकंप के दौरान राहत कार्यों से जुड़े निजी संस्मरण भी साझा किए हैं।
इन घटनाओं का जिक्र मोदी को सीधे तौर पर आंदोलन की उस पीढ़ी से जोड़ता है, जिसने इसे जमीन पर उतारा था। इन संस्मरणों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और वीएचपी कार्यकर्ताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। 2027 के चुनावों से पहले संगठन में एकजुटता और उत्साह बनाए रखने के लिए यह जमीनी जुड़ाव महत्वपूर्ण है।
युवाओं और नए वोटरों पर नजर
अपने लेख के अंत में पीएम मोदी ने युवाओं से अशोक सिंघल के आदर्शों से परिचित होने और उन्हें अपनाने की अपील की है।
राम मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है। अब पार्टी के सामने बड़ी चुनौती अगली पीढ़ी को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की इस धारा से जोड़ने की है। 2027 के विधानसभा चुनाव में पहली बार वोट करने वाले युवाओं की एक बड़ी संख्या होगी। इस लेख के जरिए प्रतीकों और स्मृतियों का इस्तेमाल कर इसी नए युवा वर्ग तक पहुंचने का आधार तैयार किया गया है।

