खाड़ी में फिर हलचल, नेतन्याहू की UAE यात्रा के पीछे क्या है पूरा खेल?

नेतन्याहू का चुपके यूएई दौरा: खाड़ी में बदलते समीकरणों की नई तस्वीरमध्य पूर्व में तनाव जारी है। हूती विद्रोहियों के साथ सऊदी अरब का संघर्ष थमा नहीं है। ईरान को लेकर पूरे क्षेत्र में सतर्कता बनी हुई है। ऐसे में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का रविवार को चुपके से संयुक्त अरब अमीरात पहुंचना सामान्य कूटनीतिक घटना नहीं माना जा सकता।
इजरायली सूत्रों के हवाले से सीएनएन ने बताया कि नेतन्याहू ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। एजेंडे में ईरान का दबदबा और दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने की चर्चा रही। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने अभी तक इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन खाड़ी की राजनीति को करीब से देखने वाले समझते हैं कि ऐसे दौरे आमतौर पर तब होते हैं जब सार्वजनिक कूटनीति से काम नहीं चल रहा हो।क्यों है यह दौरा खास?हाल के महीनों में क्षेत्रीय समीकरणों में एक बात साफ हुई है। अमेरिका और पाकिस्तान दोनों ने अपने हाथ कुछ हद तक पीछे खींचे हैं। अमेरिका की प्राथमिकताएं बदल रही हैं और वह हर संकट में सीधे और लंबे समय तक उलझने से बचता दिख रहा है। पाकिस्तान भी अपनी सीमाओं और आंतरिक मजबूरियों के चलते पुरानी सक्रियता नहीं दिखा पा रहा। ऐसे में खाड़ी देश और इजरायल दोनों को नए सिरे से अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर विचार करना पड़ रहा है। अब्राहम एकॉर्ड्स के बाद यूएई और इजरायल के संबंध सामान्य हुए थे। व्यापार, तकनीक और सुरक्षा सहयोग बढ़ा था। लेकिन गाजा युद्ध और ईरान से जुड़े तनाव ने कई पुराने समीकरणों को फिर से परीक्षा की घड़ी में ला दिया। नेतन्याहू का यह चुपके दौरा बताता है कि संकट के समय दोनों पक्ष सीधे संवाद को जरूरी मान रहे हैं।ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षासूत्रों के अनुसार मुलाकात में ईरान का मुद्दा केंद्र में रहा। यूएई और इजरायल दोनों ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों को अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती मानते हैं। हूती हमले लाल सागर और आसपास के इलाकों में शिपिंग को प्रभावित कर रहे हैं। सऊदी अरब पहले से ही इस मोर्चे पर दबाव महसूस कर रहा है। ऐसे माहौल में इजरायल और यूएई के बीच खुफिया और सुरक्षा सहयोग की चर्चा स्वाभाविक है।यह दौरा सिर्फ द्विपक्षीय नहीं दिखता। यह संकेत देता है कि खाड़ी के कुछ देश अब पारंपरिक सुरक्षा छत्र पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय नए विकल्प तलाश रहे हैं। अमेरिका की भूमिका कम सक्रिय लग रही हो, तो क्षेत्रीय शक्तियां खुद एक-दूसरे के करीब आने की कोशिश करती हैं।आगे की राह कैसी है नेतन्याहू का यह दौरा सार्वजनिक नहीं हुआ। यही इसकी असली खासियत है। जब नेता चुपके मिलते हैं तो आमतौर पर संवेदनशील सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दे एजेंडे पर होते हैं। आधिकारिक बयान बाद में आ भी सकते हैं, नहीं भी। लेकिन संदेश साफ है—मध्य पूर्व के बदलते हालात में इजरायल और यूएई दोनों एक-दूसरे को नजरअंदाज करने की स्थिति में नहीं हैं।खाड़ी की राजनीति में चुपके दौरे अक्सर बड़े बदलाव की शुरुआत होते हैं। इस बार भी नेतन्याहू की यूएई यात्रा को उसी नजरिए से देखा जा रहा है। तनाव के इस दौर में यह मुलाकात बताती है कि पुराने गठबंधन जहां कमजोर पड़ रहे हैं, वहीं नए समीकरण चुपचाप मजबूत होने की कोशिश में हैं।

