रिपोर्ट गलत थी तो मानहानि का केस क्यों नहीं? SIR पर उमर ने घेरा

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अजमल शाह
अजमल शाह

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में बीजेपी (BJP) की मदद के लिए SIR की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर कथित आंतरिक मतभेदों को उजागर करने वाली एक मीडिया रिपोर्ट का भी पुरजोर बचाव किया।

सरकार की खामोशी पर उठाए सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के नेताओं द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों का बचाव करते हुए उमर अब्दुल्ला ने अखबार की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट मनगढ़ंत थी, तो सरकार ने उसके खिलाफ मानहानि की कार्रवाई क्यों नहीं की।

मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर यह सही नहीं होती, तो सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करती, कम से कम मानहानि का मुकदमा तो करती।” उनके मुताबिक, केंद्र सरकार की निष्क्रियता और रिपोर्ट को कानूनी रूप से चुनौती न देना इस बात की खामोश स्वीकृति है कि छापी गई खबर तथ्यात्मक थी।

ECI के भीतर मतभेद का हुआ था खुलासा

हाल ही में एक अखबार ने अपनी खोजी रिपोर्ट में भारत के तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर अभूतपूर्व मतभेद का दावा किया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के भीतर कम से कम 14 बार उन फैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनकी जानकारी के बिना लिए थे।

यह आपत्तियां मुख्य रूप से मतदाता सूची के विवादास्पद ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के मुद्दे पर थीं। विपक्षी दलों का भी यह आरोप रहा है कि इस प्रक्रिया के जरिए लाखों मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया।

‘परिसीमन हम अभी भूले नहीं हैं’

जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित SIR प्रक्रिया पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इसका इस्तेमाल सीधे तौर पर चुनावों में दखल देने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने के बाद हुई परिसीमन (delimitation) प्रक्रिया का उदाहरण दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन का मकसद बीजेपी को फायदा पहुंचाना था और अब SIR भी उसी नीयत से किया जा रहा है। उमर ने कहा, “हम पहले भी इस तरह के दखल का शिकार हो चुके हैं। हम अभी तक परिसीमन को भूले नहीं हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाइयों से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा गंभीर संकट में पड़ गया है।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से उम्मीद

मुख्यमंत्री ने इस बात की उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले सुप्रीम कोर्ट का रुख अहम साबित होगा। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत में ‘फॉर्म 6’ से जुड़ी जो कार्यवाही चल रही है, उसके नतीजतन आने वाले समय में वोटर लिस्ट से लोगों के नाम हटाना और अधिक मुश्किल हो जाएगा।