जौहर यूनिवर्सिटी में 16 घंटे ED की पड़ताल, 494 करोड़ ने बढ़ाई टेंशन

azam khan
Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़ी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई बुधवार सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई और लगभग 16 घंटे बाद रात 10 बजे खत्म हुई। कार्रवाई के दौरान ED की टीमों ने यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की।

जांच के दौरान यूनिवर्सिटी कैंपस के निर्माण पर हुए करीब 494 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च से जुड़े दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी प्रबंधन इस रकम के खर्च का विस्तृत और ठोस ब्योरा जांच टीम के सामने पेश नहीं कर सका।

494 करोड़ के खर्च का हिसाब

ED की पड़ताल में कैंपस निर्माण के अलावा जमीन की खरीद और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की गई रकम से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में रहे। निर्माण कार्य में इस्तेमाल हुए करीब 88 करोड़ रुपये के सरकारी बजट से संबंधित रिकॉर्ड को लेकर भी जांच हुई।

जांच टीम ने ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी प्रबंधन से खर्च और धन के स्रोत से जुड़े दस्तावेज मांगे। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सवालों पर प्रबंधन की ओर से संतोषजनक जानकारी नहीं दी जा सकी।

11 फर्मों से मिले चंदे पर भी नजर

ED की कार्रवाई में उन 11 निजी फर्मों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड भी जांचे गए, जिन्होंने कथित तौर पर जौहर ट्रस्ट के बैंक खातों में चंदे के रूप में रकम ट्रांसफर की थी।

जांच का एक अहम पहलू इन फर्मों से ट्रस्ट तक पहुंची रकम का स्रोत और उसकी वैधता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ED इन दानदाताओं की आय और वित्तीय क्षमता से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है।

यानी जांच का दायरा सिर्फ यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च तक सीमित नहीं है। ट्रस्ट के बैंक खातों में आने वाली रकम और उसके स्रोत की पूरी वित्तीय श्रृंखला भी जांच के केंद्र में है।

रामपुर से दिल्ली तक कार्रवाई

ED की कार्रवाई रामपुर तक सीमित नहीं रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एजेंसी ने एक साथ रामपुर में छह ठिकानों, सहारनपुर में चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक के कार्यालय और आवास तथा दिल्ली में आजम खान के करीबी सहयोगियों से जुड़े परिसरों पर भी तलाशी ली।

कार्रवाई के दौरान कई वित्तीय दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित वित्तीय लेनदेन में कोई अनियमितता थी या नहीं।

खातों पर कार्रवाई होगी?

जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह संभावना जताई गई है कि यदि ट्रस्ट या संबंधित संस्थाएं रकम के स्रोत और खर्च का संतोषजनक हिसाब नहीं दे पाती हैं तो ED आगे PMLA के तहत कार्रवाई कर सकती है।