हिजाब और बदायूं पर मायावती का बयान, कहा- तूल देकर राजनीति न करें

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने स्कूलों में हिजाब और बुर्के को लेकर चल रहे विवादों के साथ-साथ बदायूं में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को लेकर उपजे तनाव पर चिंता व्यक्त की है। बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हिजाब या स्कूल यूनिफॉर्म जैसे संवेदनशील मुद्दों को तूल देकर कोर्ट-कचहरी ले जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर सुलझाया जाना चाहिए, ताकि किसी को इस पर संकीर्ण राजनीति करने का मौका न मिले।

संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला

मायावती ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान का जिक्र करते हुए देशवासियों के समान अधिकारों की बात कही। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि डॉ. आंबेडकर ने एक मानवतावादी, कल्याणकारी और सभी जाति-धर्मों के मानने वालों को एक-समान समतामूलक अधिकार देने वाला सेक्युलर संविधान दिया है।

उनके मुताबिक, इसी संविधान ने पूरे देश को एक कड़ी में जोड़कर सशक्त भारत बनाने की गारंटी सुनिश्चित की है। बसपा प्रमुख ने कहा कि इसके तहत सभी को अपने धर्म के ग्रंथों, धार्मिक रीति-रिवाजों और मान्यताओं के आधार पर शांत एवं सुखी जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन मान्यताओं की अनदेखी करने या उनमें दखल देने के बजाय सभी को उनकी पवित्रता का सम्मान करना चाहिए।

‘हिजाब और पर्दे के मुद्दे को ज्यादा तूल न दें’

स्कूलों में यूनिफॉर्म और हिजाब को लेकर अक्सर होने वाले विवादों पर मायावती ने महिलाओं की अस्मिता और सम्मान का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की अस्मिता, सम्मान और पर्दा आदि के जरिये उनके आत्म-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा जैसे मामलों को पूरी संवेदनशीलता से देखा जाना चाहिए।

स्कूलों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर या हिजाब पहनने के मामलों पर उन्होंने कहा कि इन्हें ज्यादा तूल देकर कोर्ट-कचहरी में विवाद का कानूनी मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने स्कूल प्रबंधन और शासन-प्रशासन को सलाह दी कि वे आपसी समझ और सूझबूझ से ऐसे मामलों को स्थानीय स्तर पर ही सुलझा लें। उन्होंने आगाह किया कि ऐसा न होने पर लोगों को इसकी आड़ में संकीर्ण राजनीति करने का मौका मिल जाता है।

धर्म और मान्यताओं पर टिप्पणी से बचने की अपील

अपनी पार्टी का स्टैंड स्पष्ट करते हुए मायावती ने कहा कि बीएसपी सर्वसमाज के सम्मान और उनके जान-माल व मजहब की सुरक्षा की गारंटी वाली आंबेडकरवादी पार्टी है। उन्होंने अपील की कि देश और जनहित को ध्यान में रखते हुए लोग किसी भी धर्म, धार्मिक ग्रंथ या धार्मिक मान्यताओं के संवेदनशील मामलों पर अनावश्यक टीका-टिप्पणी करने से बचें।

धार्मिक विवादों के अलावा, मायावती ने मंगलवार रात बदायूं जिले के सिकरी गांव में डॉ. आंबेडकर प्रतिमा की स्थापना को लेकर हुए बवाल पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। इस घटनाक्रम को लेकर इलाके में बने तनाव पर चिंता जताते हुए उन्होंने शासन-प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को प्रतिमा स्थापना से जुड़े इस विवाद और तनाव की स्थिति का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और इसका शांतिपूर्ण व उचित समाधान निकालना चाहिए।