और अब आकाश-दीपिका को जिम्मेदारी नहीं, मायावती ने ईशान आनंद को चुना

mayawati
शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

बहुजन समाज पार्टी (BSP) के भीतर पिछले कुछ हफ्तों से चल रही पारिवारिक उथल-पुथल पर पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका को पार्टी की जिम्मेदारियों से पूरी तरह दूर करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी में अब आनंद कुमार के दूसरे बेटे ईशान आनंद को सम्मानजनक जिम्मेदारी सौंपने की घोषणा की है।

‘ससुर अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में फंसे आकाश’

मायावती ने आकाश आनंद को दरकिनार करने का कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि शादी के बाद से उनके रवैये और गतिविधियों में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “आकाश आनंद अब अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं। ऐसे में उन्हें पार्टी में वापस लेना पार्टी के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात होगा। मैं पार्टी विरोधी ऐसा कोई गलत काम नहीं कर सकती।”

दीपिका को लेकर भी साफ किया रुख

बसपा चीफ ने आकाश की बहन दीपिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि दीपिका की शादी के बाद उनका मामला भी आकाश आनंद की तरह निकला, तो यह पार्टी के हित में नहीं होगा। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है कि आकाश और दीपिका दोनों को पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी से पूरी तरह दूर रखा जाएगा और इस फैसले में अब कोई बदलाव नहीं होगा।

ईशान आनंद पर भरोसा, लेकिन दी सख्त चेतावनी

आकाश और दीपिका की जगह अब मायावती ने ईशान आनंद पर भरोसा जताया है। उन्हें पार्टी में आगे करते हुए बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि, मायावती ने ईशान को कड़ी चेतावनी भी दी है।

उन्होंने स्पष्ट किया, “यदि ईशान ने भी पार्टी विरोधी कोई गंभीर कृत्य किया, तो उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में मेरे भाई आनंद कुमार के परिवार के किसी भी अन्य सदस्य को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं मिलेगी। इसके बजाय, पार्टी में कार्यरत दलित वर्ग के किसी वफादार और मिशनरी कार्यकर्ता को ही आगे किया जाएगा।”

कांशीराम के सिद्धांतों का दिया हवाला

अपने इस कड़े फैसले के पीछे मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में सफल होने के लिए रिश्ते-नातों के मोह से ऊपर उठना पड़ता है। कांशीराम ने आजीवन अपना परिवार नहीं बनाया और रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ से दूर रखा। मायावती ने कहा कि उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने भी अपना जीवन बहुजन समाज को समर्पित किया है, लेकिन एक महिला होने के नाते मजबूरी में उन्हें अपने छोटे भाई आनंद कुमार को सेवा के लिए साथ रखना पड़ा।

23 सितंबर को बुलाई गई ‘ऑल-इंडिया’ बैठक

पार्टी में हो रहे इन बड़े बदलावों और भविष्य की रणनीतियों को लेकर बसपा ने 23 सितंबर को एक अत्यंत महत्वपूर्ण ‘ऑल-इंडिया’ बैठक बुलाई है। इस बैठक में देश और जनहित के मुद्दों के साथ-साथ संगठन के इस खास फैसले पर भी चर्चा होगी, ताकि पार्टी कार्यकर्ता पूरी निष्ठा और ताकत के साथ संगठन के काम में जुट सकें।