गाजीपुर से दिल्ली तक स्पृहा राय का सफर, समता पार्टी में मिली बड़ी जिम्मेदारी

हर व्यक्ति के करियर की शुरुआत किसी तय नक्शे के साथ नहीं होती। कई बार मंजिल का रास्ता चलते-चलते सामने आता है। एडवोकेट स्पृहा राय की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर से निकलकर दिल्ली पहुंचने और फिर कानून को अपना पेशा बनाने तक का उनका सफर बदलाव, सीखने और लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
एविएशन से हटकर कानून की ओर कदम
स्पृहा राय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई और 12वीं तक की शिक्षा गाज़ीपुर में ही पूरी की। दिल्ली आने के बाद उनके करियर की पहली कल्पना कानून की दुनिया से नहीं जुड़ी थी। शुरुआत में उनका रुझान एविएशन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की ओर था। हालांकि, समय के साथ उन्हें यह अहसास हुआ कि उनकी असली मंजिल और पेशा वकालत है। इसके बाद उन्होंने अपने करियर की दिशा बदली और ग्रेटर नोएडा स्थित ईशान इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ से पांच वर्षीय B.A. LL.B. की पढ़ाई पूरी की, जो मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) से संबद्ध है।
किताबों से आगे अदालत का व्यावहारिक ज्ञान
स्पृहा के मुताबिक, कानून की पढ़ाई के दौरान उन्होंने खुद को केवल किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं रखा। इंटर्नशिप और कोर्ट विजिट के जरिए उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि कानून वास्तव में अदालत और लोगों की जिंदगी में किस तरह काम करता है। उनका मानना है कि कानून की धाराएं पढ़ना और वास्तविक परिस्थितियों व विवादों के बीच उन कानूनों को लागू करना दो अलग-अलग अनुभव हैं।
आज वह दिल्ली हाई कोर्ट के साथ-साथ विभिन्न जिला एवं अधीनस्थ अदालतों से जुड़े मामलों में प्रैक्टिस कर रही हैं। इसके अलावा, वह जरूरत के अनुसार देश के अलग-अलग राज्यों और न्यायिक क्षेत्रों में भी काम करती हैं।
क्रिमिनल लॉ से RERA और साइबर अपराधों तक प्रैक्टिस
स्पृहा राय की पेशेवर रुचि किसी एक कानूनी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उनकी प्रैक्टिस में कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं:
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क्रिमिनल लॉ और सिविल लिटिगेशन
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वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद
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कंज्यूमर मामले और आर्बिट्रेशन
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RERA और रियल एस्टेट विवाद
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साइबर अपराध और कॉरपोरेट-कमर्शियल मामले
लीगल रिसर्च और ड्राफ्टिंग उनके पेशे का एक अहम हिस्सा है। किसी भी मामले को आगे बढ़ाने से पहले तथ्यों और कानूनी पहलुओं की गहराई से पड़ताल करना उनके काम करने के तरीके में शामिल है। नए और मुश्किल मामलों को देखकर पीछे हटने के बजाय, वह पहले उस पर रिसर्च कर जरूरी जानकारी जुटाने में विश्वास रखती हैं।
सामाजिक जुड़ाव और प्रो-बोनो कार्य
स्पृहा राय के लिए वकालत केवल अदालत में दलीलों तक सीमित नहीं है। वह समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों से मिलना और उनके अनुभवों को समझना पेशे का अहम हिस्सा मानती हैं। इसी सोच के साथ वह ‘प्रो-बोनो’ (निःशुल्क) कानूनी कार्यों से भी जुड़ी रही हैं, जहां उन्होंने जरूरतमंद लोगों को बिना कोई प्रोफेशनल फीस लिए कानूनी सहायता उपलब्ध कराई है।

संगठनात्मक जिम्मेदारियां: कानूनी पेशे के साथ-साथ स्पृहा सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रही हैं।
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वह सवर्ण विकास मंच के ‘विमेंस मोर्चा’ से जुड़ी रही हैं।
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15 जून 2026 को समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय कुमार मंडल द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, स्पृहा राय को समता पार्टी (विमेंस सेल, दिल्ली यूनिट) में भी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन सामाजिक गतिविधियों ने उन्हें अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों से जुड़ने और सार्वजनिक मुद्दों के करीब रहने का अवसर दिया है।
निरंतर सीखने का लक्ष्य
आज स्पृहा राय का प्राथमिक फोकस अपनी कानूनी प्रैक्टिस और एक लीगल रिसर्चर के रूप में खुद को बेहतर बनाने पर है। उनका मानना है कि हर नया मामला सीखने का एक नया अवसर होता है और हर क्लाइंट की परिस्थिति कानून को नए नजरिए से देखने का मौका देती है। गाज़ीपुर से शुरू हुआ उनका यह सफर दिल्ली की अदालतों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है, जहां वह कानून की बारीकियों के साथ-साथ समाज की जमीनी हकीकत से भी जुड़ी हुई हैं।
