100 करोड़ के ठेके रद्द, ‘लकी ड्रॉ’ से सिंडिकेट चलाने वाला मास्टरमाइंड फरार

कानपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद कानपुर नगर निगम (KMC) में सालों से चल रहे करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। 22 अगस्त को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई थी। इसके कुछ ही घंटों के भीतर 100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर निरस्त कर दिए गए और पुलिस ने टेंडर सिंडिकेट के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है।
कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस नेक्सस का खुलासा किया। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की जांच के आधार पर 7 फर्मों और उनके संचालकों के खिलाफ 6 एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सिंडिकेट से जुड़े दो बड़े ठेकेदारों को गिरफ्तार कर लिया है।
मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा का सिंडिकेट और ‘लकी ड्रॉ’ का खेल
पुलिस कमिश्नर के खुलासे के मुताबिक, नगर निगम में ठेकों का एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसे मूल रूप से आगरा का रहने वाला गोविंद शर्मा चला रहा था। छोटे कामों के लिए 400 और बड़े कामों के लिए 27 फर्में पंजीकृत थीं, लेकिन ठेका किसे मिलेगा, यह केवल गोविंद शर्मा तय करता था।
गोविंद शर्मा ठेकेदारों को डरा-धमका कर 15 प्रतिशत डाउन पेमेंट पर टेंडर डलवाता था। इसके बाद 85 प्रतिशत पर समान रेट खुलने पर ‘लकी ड्रॉ’ का फर्जी नाटक किया जाता था। इस पूरी सांठगांठ के जरिए अंततः टेंडर गोविंद की चहेती फर्म को ही मिल जाता था। कानपुर आने से पहले वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह का काम करता था और यहां आकर उसने सभी ठेकेदारों को अपने नियंत्रण में ले लिया।
दो ठेकेदार गिरफ्तार, सरगना राजस्थान फरार
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने संदीप जैन और रज्जन बाजपेई नाम के दो बड़े ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया है। उसकी आखिरी लोकेशन राजस्थान में ट्रेस की गई है और पुलिस जल्द ही उसकी गिरफ्तारी का दावा कर रही है।
दर्ज मुकदमों में से 5 मामले नगर आयुक्त की तहरीर पर स्वरूप नगर थाने में दर्ज किए गए हैं, जबकि छठा मुकदमा एक पीड़ित ठेकेदार सनी सिंह की शिकायत पर फजलगंज थाने में दर्ज हुआ है। जल्द ही इस मामले में सातवीं एफआईआर भी दर्ज होने की संभावना है।
दागी फर्मों पर एक्शन और SIT का गठन
जिन फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी, रंगदारी और डराने-धमकाने के आरोप में एफआईआर हुई है, उनमें मेसर्स दिलीप बाजपेई, मेसर्स अजय इंटरप्राइजेज, मेसर्स पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज (दो मुकदमे) शामिल हैं।
भ्रष्टाचार के इस नेक्सस, सफेदपोशों और निगम के अधिकारियों की मिलीभगत की जांच के लिए ADCP सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में 4 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस टीम में ACP स्वरूप नगर ज्योति श्री, फजलगंज इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय और स्वरूप नगर इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह शामिल हैं। SIT अब इन ब्लैक लिस्टेड फर्मों के GST नंबर, बैंक खातों और उनकी अन्य फर्मों की कुंडली खंगालेगी। पुलिस ने साफ किया है कि आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ठेकेदारों में मची भगदड़
नगर आयुक्त ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए 100 करोड़ के टेंडर रद्द करने के साथ ही ठेकेदारों के भुगतान पर रोक लगा दी है। इसके अलावा नई फर्मों के पंजीकरण पर भी पाबंदी लगा दी गई है। रविवार को हॉट मिक्स प्लांट वाले बड़े ठेकेदारों के भौंती और किदवईनगर स्थित ठिकानों पर छापेमारी की गई। पुलिस और प्रशासन की इस कार्रवाई से टेंडर माफियाओं में दहशत है। हालात यह हैं कि अजय इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के प्लांट पर ताले लटके मिले हैं और ठेकेदार ने खुद ही अपना पंजीकरण निरस्त करने की गुहार लगाई है।
