कानपुर देहात में BJP का क्लीन स्वीप बरकरार रहेगा या SP करेगी वापसी?

उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कानपुर नगर से सटा कानपुर देहात जिला प्रदेश की चुनावी राजनीति में अपना एक अलग और अहम स्थान रखता है। यह जिला अपनी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, ग्रामीण आबादी और जटिल सामाजिक समीकरणों के लिए जाना जाता है।
2027 के यूपी विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों ने कानपुर देहात की 4 विधानसभा सीटों—रसूलाबाद, अकबरपुर रनिया, सिकंदरा और भोगनीपुर—पर अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पिछले एक दशक में इस जिले ने चुनाव दर चुनाव अपना सियासी मिजाज बदला है।
कानपुर देहात का चुनावी इतिहास: 2012 में सपा, तो 17 और 22 में चला BJP का जादू
कानपुर देहात की राजनीति को समझने के लिए इसके पिछले तीन चुनावों का इतिहास बेहद अहम है।
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2012 विधानसभा चुनाव: समाजवादी पार्टी (SP) ने जिले की चारों सीटों पर क्लीन स्वीप किया था।
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2017 विधानसभा चुनाव: सियासी हवा बदली और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सपा का सूपड़ा साफ करते हुए चारों सीटों पर कब्जा जमा लिया।
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2022 विधानसभा चुनाव: बीजेपी ने अपना शानदार प्रदर्शन दोहराया और फिर से चारों सीटें जीत लीं।
लगातार दो चुनावों में क्लीन स्वीप ने बीजेपी की जड़ों को यहां मजबूत किया है, लेकिन 2027 में समाजवादी पार्टी अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने के लिए पूरा जोर लगाएगी।
कानपुर देहात का सामाजिक समीकरण और आबादी
2011 की जनगणना के आधार पर जिले की कुल आबादी करीब 17.96 लाख है। जिले का मिजाज पूरी तरह से ग्रामीण है, जहां 90% आबादी गांवों में बसती है।
| विवरण | आंकड़े |
| कुल मतदाता (SIR डेटा) | 11,83,000 |
| हिंदू आबादी | 89.8% |
| मुस्लिम आबादी | 9.8% |
| अनुसूचित जाति (SC) आबादी | 25.6% |
ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण यहां चुनाव मुख्य रूप से कृषि, ग्रामीण विकास, रोजगार और जातीय समीकरणों पर लड़े जाते हैं।
चारों विधानसभा सीटों का चुनावी गणित और 2022 के नतीजे
1. रसूलाबाद (SC) विधानसभा सीट (205) यह जिले की एकमात्र अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है और कन्नौज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां 93.1% आबादी ग्रामीण है।
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2022 का नतीजा: बीजेपी की पूनम संखवार ने 91,783 वोट (46.77%) पाकर सपा के कमलेश चंद्र दिवाकर (70,271 वोट) को 21,512 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। बीएसपी यहां तीसरे नंबर पर रही थी। 2027 में सपा को यहां दलित और पिछड़े वर्ग के वोटरों में बड़ी सेंधमारी करनी होगी।
2. अकबरपुर रनिया विधानसभा सीट (206) अकबरपुर लोकसभा का हिस्सा यह सीट जिले की महत्वपूर्ण सामान्य सीट है। यहां जिले में सबसे ज्यादा SC आबादी (26.5%) है।
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2022 का नतीजा: बीजेपी और सपा के बीच यहां कड़ा मुकाबला देखने को मिला। बीजेपी की प्रतिभा शुक्ला ने 92,827 वोट हासिल किए, जबकि सपा के डॉ. राम प्रकाश कुशवाहा को 79,410 वोट मिले। बीजेपी की जीत का अंतर 13,417 वोट रहा। यह करीबी अंतर बताता है कि 2027 में जरा सा वोट स्विंग नतीजे पलट सकता है।
3. सिकंदरा विधानसभा सीट (207) इटावा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली इस सीट पर जिले में सबसे अधिक ग्रामीण आबादी (95.1%) है।
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2022 का नतीजा: बीजेपी के अजीत सिंह पाल ने 89,461 वोट (44.89%) हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की। सपा के प्रभाकर पांडे (57,894 वोट) काफी पीछे रह गए। इस ग्रामीण बहुल क्षेत्र में बीजेपी की पैठ काफी गहरी नजर आती है, जिसे भेदना विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी।
4. भोगनीपुर विधानसभा सीट (208) जालौन लोकसभा के तहत आने वाली इस सीट पर जिले में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी (15.7%) और शहरी आबादी (13.3%) है।
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2022 का नतीजा: यहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला। बीजेपी के राकेश सचान ने 87,809 वोट पाकर जीत दर्ज की, सपा के नरेंद्र पाल सिंह को 75,916 वोट मिले (हार का अंतर: 11,893 वोट)। खास बात यह रही कि बीएसपी के जुनेद खान ने 47,332 (21.70%) वोट हासिल किए।
2027 में क्या होगा?
कानपुर देहात में आगामी चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है। भोगनीपुर और अकबरपुर रनिया में जीत-हार का अंतर बहुत बड़ा नहीं है, जहां बीएसपी का वोट बैंक ‘किंगमेकर’ या ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। बीजेपी के सामने अपना किला बचाने की चुनौती है, तो वहीं सपा ‘पीडीए’ (PDA) फॉर्मूले के जरिए ग्रामीण और दलित-मुस्लिम वोटरों को साधकर वापसी की राह तलाश रही है।

