ईरान ने पड़ोसी देशों को क्या चेतावनी दी और किस बात पर भड़का तेहरान

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सैयद सरवर हुसैन - कंट्री हेड- ईरान
सैयद सरवर हुसैन – कंट्री हेड- ईरान

तेहरान: ईरान के विदेश मंत्रालय ने क्षेत्रीय और खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर भविष्य में किसी भी देश ने अमेरिका या इजरायल को ईरान पर हमलों के लिए अपनी जमीन या सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने दिया, तो उसका जवाब ‘अलग और निर्णायक’ होगा। तेहरान में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी मुल्कों से अच्छे पड़ोसियों जैसा व्यवहार बनाए रखने की उम्मीद करता है।

जमीन देने वाले देश पुनर्विचार करें: बघाई

बघाई ने कहा कि हालिया सैन्य टकराव के दौरान जिन क्षेत्रीय देशों ने अमेरिका और इजरायली बलों को अपनी सुविधाएं और ठिकाने उपलब्ध कराए थे, उन्हें अपने इस रवैये पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि सैन्य हमलों में भागीदारी के लिए ऐसे देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह हैं।

बघाई ने कहा कि अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और हस्तक्षेप को लेकर क्षेत्र के सभी देशों का अनुभव कड़वा रहा है और भूगोल के लिहाज से वे ‘हमेशा के पड़ोसी’ हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में इजरायली प्रधानमंत्री की मौजूदगी पर आपत्ति दर्ज कराते हुए उन्होंने कहा कि इजरायल क्षेत्र में मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ईरान ने फारस की खाड़ी के लगभग सभी दक्षिणी देशों के साथ सकारात्मक बैठकें की हैं।

हॉर्मुज पर 7 दिन का प्लान और अमेरिकी प्रस्ताव पर रुख

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बघाई ने कहा कि ईरान का सात दिवसीय प्रस्ताव कूटनीति का रास्ता खुला रखने की पहल था, जिससे दुनिया ने तेहरान का सद्भावनापूर्ण रुख देखा।

कतर के जरिए मिले अमेरिकी प्रस्तावों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे काफी हद तक पुराने अमेरिकी रुख को ही दोहराते हैं और मुख्य रूप से परमाणु मुद्दे से जुड़े हैं। बघाई के मुताबिक, इस चरण में ईरान का प्राथमिक फोकस हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर है। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज में आवागमन सामान्य करने के लिए अमेरिका को ठोस कदम उठाने होंगे, जिसमें ईरान के कमर्शियल जहाजों के रास्ते में बाधा डालना बंद करना, हाल में लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना और ‘इस्लामाबाद सहमति’ का सम्मान करना शामिल है।

ब्रिटिश एयरबेस विवाद: राजदूत को तलब कर दर्ज कराया विरोध

प्रवक्ता ने जानकारी दी कि ब्रिटिश एयरबेस से जुड़ी एक कथित घटना में ईरान का नाम घसीटे जाने के विरोध में गुरुवार को ब्रिटेन के राजदूत को तलब किया गया था। बघाई ने ब्रिटेन के आरोपों को ‘बेबुनियाद’ करार दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया हमलों में अपनी सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने देकर ब्रिटेन ने सीधी भागीदारी की है और वह इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। उन्होंने नाटो महासचिव मार्क रुटे के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने माना था कि इस सैन्य अभियान के दौरान यूरोप के एयरबेसों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ था।

राजनयिकों के निष्कासन की खबर खारिज, इराक से अमेरिकी वापसी का स्वागत

81वीं यूएन महासभा में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी को सफल बताते हुए बघाई ने अमेरिकी मीडिया की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें दो ईरानी राजनयिकों को निष्कासित किए जाने का दावा किया गया था। उन्होंने इसे ‘कोरा झूठ’ बताया और कहा कि एक राजनयिक अमेरिकी दबाव के चलते लौटे, जबकि बाकी तय कार्यक्रम के तहत वापस आए।

इसके अतिरिक्त, बघाई ने इराक से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी को एक ‘महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम’ करार दिया। उन्होंने कहा कि 23 साल के विदेशी कब्जे ने क्षेत्र में हिंसा और अस्थिरता को बढ़ाया था, और यह वापसी इराक की संप्रभुता को मजबूत करने के साथ-साथ अमेरिकी विफलता को दर्शाती है।