Flavio Bolsonaro ने लूला को पछाड़ा, ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव अब दूसरे दौर में

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

ब्रासीलिया: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोलसोनारो ने मौजूदा राष्ट्रपति और वामपंथी नेता लुईस इनासियो लूला डा सिल्वा को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, कड़े मुकाबले के बावजूद बोलसोनारो 50 प्रतिशत के जादुई आंकड़े को पार नहीं कर सके, जिसके चलते राष्ट्रपति पद का अंतिम फैसला अब दूसरे दौर (रन-ऑफ) के मतदान में होगा। चुनाव के इस निर्णायक चरण में फ्लावियो बोलसोनारो और लूला डा सिल्वा के बीच 25 अक्टूबर को सीधा मुकाबला होगा।

50% का आंकड़ा न छूने से दूसरे दौर में पहुंचा चुनाव

ब्राजील के चुनावी नियमों के तहत यदि पहले चरण में किसी भी उम्मीदवार को कुल वैध मतों का 50 प्रतिशत से अधिक हासिल नहीं होता है, तो शीर्ष पर रहने वाले दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर का चुनाव कराया जाता है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 98.8 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक फ्लावियो बोलसोनारो को लगभग 47.2 प्रतिशत वोट मिले, जबकि मौजूदा राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा 44.9 प्रतिशत मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

सर्वे के अनुमानों से उलट रहे नतीजे

मतदान से पहले सामने आए ज्यादातर जनमत सर्वेक्षणों (सर्वे) में लूला डा सिल्वा की बढ़त का अनुमान जताया गया था और मुकाबले को बेहद नजदीकी माना जा रहा था। हालांकि, मतपेटियां खुलने के बाद 45 वर्षीय फ्लावियो बोलसोनारो ने इन अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए बढ़त बनाई।

फ्लावियो बोलसोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के बेटे हैं। जायर बोलसोनारो को पिछले राष्ट्रपति चुनाव में मिली हार के बाद तख्तापलट की साजिश रचने के मामले में अदालत की ओर से 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई है।

‘लोकतंत्र बनाम बर्बरता’: बयानों से गरमाया माहौल

पहले दौर के नतीजे सामने आने के बाद दोनों ही नेताओं ने अपने समर्थकों को संबोधित किया। राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने कहा कि इस चुनाव में देश के सामने लोकतंत्र और ‘बर्बरता’ के बीच फैसला करने का सवाल है। वहीं, बढ़त बनाने वाले फ्लावियो बोलसोनारो ने अपने संबोधन में कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य ‘ब्राजील की जनता को मुक्त करना’ है।

अन्य उम्मीदवारों के वोट बैंक पर टिकी निगाहें

पहले चरण के मतदान में कई अन्य उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में थे, जिनमें अन्य दक्षिणपंथी दलों के नेता भी शामिल थे। अब दूसरे दौर के सीधे मुकाबले में इन बाहर हो चुके उम्मीदवारों को मिले मत और उनके समर्थकों का रुख बेहद अहम साबित होगा। दोनों प्रत्याशियों के पास प्रचार के लिए अब लगभग तीन सप्ताह का समय बाकी है, जिसके बाद 25 अक्टूबर को मतदाता देश के नए राष्ट्रपति पर अंतिम मुहर लगाएंगे।