चिट्ठी का हवाला: ईरान ने UK-फ्रांस से इजरायल पर ठोस कार्रवाई की मांग की
News Desk August 23, 2026

ईरान ने ब्रिटेन और फ्रांस से इजरायल को लेकर केवल चिंता जताने के बजाय ठोस कदम उठाने की मांग की है। ईरानी उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने 102 पूर्व ब्रिटिश और फ्रांसीसी राजनयिकों की खुली चिट्ठी का हवाला देते हुए हथियारों की सप्लाई रोकने, बस्तियों से जुड़े व्यापार पर प्रतिबंध लगाने और अंतरराष्ट्रीय अदालतों के फैसलों को लागू करने की अपील की।
ग़रीबाबादी ने कहा कि लंदन और पेरिस को इस स्थिति पर सिर्फ ‘चिंता व्यक्त करने’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके मुताबिक, इजरायल को हथियार और किसी भी तरह का समर्थन देना उसके अपराधों में सहयोग और भागीदारी के बराबर है।
102 पूर्व राजनयिकों ने क्या मांग की?
Le Monde में शनिवार को प्रकाशित खुली चिट्ठी में 102 पूर्व ब्रिटिश और फ्रांसीसी राजनयिकों ने दोनों देशों से इजरायल के खिलाफ संयुक्त रूप से प्रतिबंध लगाने और फिलिस्तीन में अंतरराष्ट्रीय कानून को बनाए रखने के लिए साथ मिलकर कार्रवाई करने की अपील की।
हस्ताक्षर करने वालों में संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत जेरेमी ग्रीनस्टॉक और एमिर जोन्स पैरी के अलावा फ्रांस के पश्चिम एशिया मामलों के पूर्व निदेशक यवेस ऑबिन डी ला मेस्यूजियर और डेनिस बाउचार्ड शामिल हैं।
राजनयिकों ने कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाकों में घरों को गिराए जाने और बसने वालों की हिंसा पर चिंता जताई। चिट्ठी में आरोप लगाया गया कि ये गतिविधियां इजरायली सेना और पुलिस की ‘मिलीभगत’ से होती हैं और इन्हें ‘जातीय सफाया’ के रूप में देखा जाना चाहिए।
हथियारों की सप्लाई और बस्तियों से व्यापार रोकने की मांग
पूर्व राजनयिकों ने यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के इजरायल के साथ व्यापार समझौतों को निलंबित करने की मांग की। इसके साथ हथियारों की आपूर्ति और सैन्य सहयोग रोकने तथा अवैध बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाने की अपील की गई।
चिट्ठी में कब्जे वाली फिलिस्तीनी जमीन पर नागरिकों को ‘संपत्ति’ खरीदने से रोकने की मांग भी रखी गई है।
राजनयिकों ने गाजा में UNRWA और अन्य संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के जरिए मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने पत्रकारों, राजनयिकों और सांसदों के लिए भी सुरक्षित पहुंच की मांग की।
पूर्व ब्रिटिश राजदूत ने वेस्ट बैंक की बस्तियों पर जताई चिंता
ईरानी अधिकारी के बयान के साथ सामने आई प्रतिक्रिया में ईरान, कतर और यमन में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत निकोलस हॉप्टन ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार को तत्काल चिंता का विषय बताया।
हॉप्टन के मुताबिक, तेल अवीव की ओर से वेस्ट बैंक में इस तरह बस्तियां बनाए जाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना मुश्किल हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब भी सबसे प्रभावशाली बाहरी पक्ष बना हुआ है। हॉप्टन ने चेतावनी दी कि लगातार निष्क्रियता लंबे समय में ऐसा संकट पैदा कर सकती है जिसका समाधान मुश्किल हो और इससे भविष्य में हिंसा तथा त्रासदियां बढ़ सकती हैं।
2025 में फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता का भी जिक्र
खुली चिट्ठी में कहा गया कि ब्रिटेन और फ्रांस ने 2025 में फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दी थी। हस्ताक्षरकर्ताओं का तर्क है कि अब इस मान्यता को तत्काल कार्रवाई के जरिए व्यावहारिक रूप देना जरूरी है।
चिट्ठी में युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की गई। राजनयिकों के मुताबिक, ऐसी कार्रवाई से ही ब्रिटेन और फ्रांस की सरकारें ‘दोहरे मानदंड’ के आरोप का जवाब दे सकती हैं।
ग़रीबाबादी ने इसी खुली चिट्ठी को आधार बनाकर लंदन और पेरिस से अपनी नीतियों पर ठोस कदम उठाने की अपील की है। दूसरी ओर, हॉप्टन ने अमेरिका की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि पश्चिमी देशों की निष्क्रियता का असर आने वाले समय में और गंभीर हो सकता है।
