पहले दिन अमेरिका, दूसरे दिन खुलेगा होर्मुज! ईरान ने रखा टू-डे फॉर्मूला

Abbas Araghchi
सैयद सरवर हुसैन - कंट्री हेड- ईरान
सैयद सरवर हुसैन – कंट्री हेड- ईरान

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और सामान्य नेविगेशन बहाल करने के लिए एक ‘टू-डे प्लान’ (दो दिन की योजना) का प्रस्ताव दिया है। अरागची के मुताबिक, कतर की मध्यस्थता में चल रही बातचीत के बाद यह योजना तैयार की गई है, जिसमें पहले दिन अमेरिका को कुछ कदम उठाने होंगे और इसके बाद ही ईरान जलमार्ग खोलेगा।

क्या है ईरान का ‘टू-डे प्लान’?

अरागची के हवाले से ‘क्लैश रिपोर्ट’ ने बताया, “हम अब एक दो-दिवसीय योजना तक पहुंच गए हैं। इसका मतलब है कि पहले दिन अमेरिका कई उपायों को लागू करेगा, और दूसरे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा।” इस योजना के तहत दूसरे दिन से ट्रांजिट अपनी पिछली स्थिति में लौट आएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की इन मांगों में प्रतिबंधों से राहत (sanctions relief) शामिल हो सकती है।

सात दिन के प्रस्ताव को किया गया छोटा

यह नया प्रस्ताव पहले के सात-दिवसीय प्लान का एक छोटा रूप है। कतरी मध्यस्थों के साथ विचार-विमर्श के बाद इसे घटाकर 48 घंटे कर दिया गया है। अल जज़ीरा और द वाशिंगटन टाइम्स ने भी अरागची के इस बयान की पुष्टि की है। यह स्पष्ट किया गया है कि यह अभी केवल एक प्रस्ताव है, कोई अंतिम समझौता नहीं। अरागची ने बताया कि बातचीत “कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ रही है,” लेकिन फिलहाल कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकला है।

अमेरिकी रुख और दावों में विरोधाभास

ईरान की यह योजना पूरी तरह से अमेरिकी कार्रवाई पर निर्भर है। वाशिंगटन ने अब तक सार्वजनिक रूप से इस दो-दिवसीय ढांचे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है या इसे स्वीकार नहीं किया है। एक तरफ जहां ईरान ने जलडमरूमध्य में नेविगेशन बहाल करने के लिए शर्तें रखी हैं, वहीं अमेरिकी सेना का दावा है कि होर्मुज पूरी तरह खुला हुआ है।

कतर की भूमिका और वैश्विक असर

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक बेहद अहम चोकपॉइंट (chokepoint) है। ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच इसके बाधित होने से ऊर्जा संकट का जोखिम बढ़ गया है। तनाव कम करने और बातचीत दोबारा शुरू करने के व्यापक प्रयासों के तहत कतर लगातार वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता कर रहा है। अरागची ने स्पष्ट किया कि उनकी दोहा यात्रा का उद्देश्य अमेरिकी पक्ष के साथ सीधी बातचीत करना नहीं था, बल्कि दोनों देशों के बीच यह चर्चा कतरी मध्यस्थों के जरिए ही जारी रही।