भारत समन भेजेगा, लेकिन असली सवाल है कि सईद पेश नहीं हुआ तो क्या होगा?

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अजमल शाह
अजमल शाह

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के खिलाफ भारतीय अदालत में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने की तैयारी है। जम्मू की विशेष NIA अदालत अब विदेश मंत्रालय (MEA) के जरिए सईद को समन भेजने की प्रक्रिया शुरू करेगी। उसे अदालत में पेश होकर मुकदमे का सामना करने के लिए कहा जाएगा।

सईद के खिलाफ इस मामले में पहले ही गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है। NIA ने अपनी supplementary chargesheet में उसे 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की साजिश में शामिल प्रमुख आरोपियों में नामजद किया है। हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक समेत 26 लोगों की मौत हुई थी।

MEA के जरिए पाकिस्तान भेजा जाएगा समन

अदालत की ओर से जारी समन को पाकिस्तान तक पहुंचाने के लिए राजनयिक माध्यम का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए विदेश मंत्रालय की भूमिका होगी। इस प्रक्रिया के जरिए सईद को जम्मू की विशेष NIA अदालत के सामने पेश होने के लिए कहा जाएगा।

यह कदम उस स्थिति में महत्वपूर्ण हो जाता है जब आरोपी भारत में मौजूद नहीं है और उसके खिलाफ पहले से गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है। अदालत की आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी।

पेश नहीं हुआ तो BNSS की धारा 356 का प्रावधान

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 356 घोषित अपराधी के खिलाफ उसकी गैर-मौजूदगी में inquiry, trial या judgment की व्यवस्था करती है। लेकिन इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है।

India Code के मुताबिक, अदालत किसी ऐसे proclaimed offender के खिलाफ गैर-मौजूदगी में ट्रायल आगे बढ़ा सकती है, जो गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार है और जिसकी तत्काल गिरफ्तारी की संभावना नहीं है। अदालत को इसके लिए लिखित कारण दर्ज करने होते हैं।

धारा 356 के तहत ट्रायल शुरू करने से पहले लगातार दो गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने चाहिए और उनके बीच कम से कम 30 दिन का अंतर होना चाहिए। इसके बाद आरोपी को पेश होने के लिए सार्वजनिक नोटिस भी प्रकाशित करना होता है। आरोप तय होने के बाद 90 दिन की अवधि पूरी होने से पहले इस तरह का ट्रायल शुरू नहीं किया जा सकता।

अगर आरोपी की ओर से कोई वकील मौजूद नहीं है तो कानून के तहत राज्य की ओर से उसके बचाव के लिए वकील उपलब्ध कराया जाता है। यानी सईद के पेश नहीं होने की स्थिति में भी मुकदमा आगे बढ़ाने का कानूनी रास्ता मौजूद है, लेकिन इसके लिए धारा 356 में तय शर्तें पूरी करनी होंगी।

22 अप्रैल 2025 को हुआ था पहलगाम हमला

पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई थी। शुरुआती जांच के बाद मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपा गया।

NIA ने 15 दिसंबर 2025 को दाखिल अपनी मूल chargesheet में पाकिस्तान स्थित LeT/TRF और छह अन्य आरोपियों को नामजद किया था। यह chargesheet 1,597 पन्नों की थी और इसे जम्मू की विशेष NIA अदालत में दाखिल किया गया था।

इसके बाद जुलाई 2026 में NIA ने supplementary chargesheet दाखिल की, जिसमें हाफिज सईद का नाम शामिल किया गया। एजेंसी ने उसे LeT/TRF से जुड़ा प्रमुख व्यक्ति बताते हुए पहलगाम हमले की साजिश में उसकी भूमिका का आरोप लगाया है।

मूल चार्जशीट में सात आरोपी थे

दिसंबर 2025 की मूल chargesheet में LeT/TRF और पाकिस्तान स्थित हैंडलर साजिद जट्ट समेत सात आरोपियों को नामजद किया गया था। NIA के मुताबिक, chargesheet में पहलगाम हमले की planning, facilitation और execution से जुड़े आरोपों और साक्ष्यों का विवरण दिया गया था।

NIA के अनुसार, मूल मामले में नामजद तीन पाकिस्तानी आतंकी बाद में जुलाई 2025 में दाचीगाम में सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में मारे गए थे। दो स्थानीय आरोपियों को आतंकियों को पनाह और मदद देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह जानकारी मूल chargesheet से जुड़ी NIA की कार्रवाई का हिस्सा है।

अब supplementary chargesheet में हाफिज सईद का नाम जुड़ने के बाद अदालत के स्तर पर उसके खिलाफ अगली कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। समन की तामील के लिए MEA के जरिए राजनयिक चैनल का इस्तेमाल किया जाएगा।