3.4 किमी से 1,155 किमी! भारत के मेट्रो नेटवर्क ने कैसे जापान को छोड़ा पीछे

आज से ठीक 42 साल पहले, 24 अक्टूबर 1984 को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भारत की पहली मेट्रो दौड़ी थी। तब यह रूट महज 3.4 किलोमीटर का था। आज यह नेटवर्क देश के 26 से अधिक शहरों तक पहुंच चुका है और 1155 किलोमीटर का आंकड़ा पार कर गया है। विस्तार की इस तेज रफ्तार के दम पर भारत अब जापान और दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश बन गया है।
3.4 किलोमीटर के रूट से हुई थी शुरुआत
भारत में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए कोलकाता को करीब दो दशक का इंतजार करना पड़ा था। 1969 में ‘मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट’ की शुरुआत हुई और 1971 में इसका मास्टर प्लान तैयार किया गया। ट्रैफिक स्टडी के आधार पर सबसे पहले दमदम – टॉलीगंज कॉरिडोर पर 29 दिसंबर 1972 को काम शुरू हुआ। 24 अक्टूबर 1984 को एस्प्लेनेड और भवानीपुर के बीच 3.4 किलोमीटर के हिस्से पर देश की पहली मेट्रो लाइन चालू हुई, जिसमें पांच स्टेशन शामिल थे। आज कोलकाता मेट्रो में रोजाना करीब 5 लाख यात्री सफर करते हैं।
18 साल का लंबा इंतजार और दिल्ली मेट्रो की एंट्री
कोलकाता मेट्रो के शुरू होने के बाद देश के किसी दूसरे शहर में मेट्रो सेवा पहुंचने में 18 साल का समय लगा। 2002 में दिल्ली मेट्रो ने शाहदरा से तीस हजारी के बीच अपना सफर शुरू किया। समयबद्ध निर्माण और स्वच्छता के मॉडल पर तैयार यह सर्विस अर्बन ट्रांसपोर्ट के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई। मौजूदा समय में दिल्ली-एनसीआर का मेट्रो नेटवर्क 416 किलोमीटर से अधिक लंबा है और 300 से ज्यादा स्टेशनों के साथ यह दुनिया के सबसे बड़े शहरी मेट्रो नेटवर्कों में गिना जाता है।
एक दशक में 4 गुना से ज्यादा विस्तार
साल 2014 तक देश में मेट्रो नेटवर्क सिर्फ 248 किलोमीटर का था और यह केवल पांच शहरों तक सीमित था। आज यह दायरा बढ़कर 1,155 किलोमीटर से ज्यादा हो चुका है। अब मेट्रो सिर्फ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या बेंगलुरु तक सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ, कानपुर, आगरा, भोपाल, इंदौर, जयपुर, नागपुर, पुणे, कोच्चि, पटना और मेरठ जैसे टियर-2 शहर भी इससे जुड़ चुके हैं। निर्माण की गति जो पहले एक महीने में 600 मीटर थी, वह अब करीब 6 किलोमीटर प्रति माह तक पहुंच चुकी है।
अब अमेरिका को पीछे छोड़ने की तैयारी
साल 2022 में 800 किलोमीटर का आंकड़ा पार करते ही भारत ने मेट्रो नेटवर्क के मामले में जापान को पीछे छोड़ दिया था। ग्लोबल आंकड़ों के मुताबिक, इस वक्त चीन 10,000 किलोमीटर से ज्यादा नेटवर्क के साथ पहले स्थान पर है। वहीं, अमेरिका 1386 किलोमीटर से ज्यादा नेटवर्क के साथ दूसरे नंबर पर है।
भारत (1155 किमी) और अमेरिका के बीच अब सिर्फ 216 किलोमीटर का फासला रह गया है। देशभर में अभी करीब 1000 किलोमीटर की नई मेट्रो लाइनों पर निर्माण कार्य चल रहा है। 1984 में कुछ हजार यात्रियों से शुरू हुई यह सर्विस आज देशभर में 1.15 करोड़ से अधिक लोगों के लिए डेली कम्यूट की लाइफलाइन बन चुकी है।

