UNGA में एर्दोगन ने कश्मीर पर क्या कहा और भारत ने कैसे दिया जवाब

विदेश मंत्रालय (MEA) ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और देश की क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष का दखल स्वीकार नहीं किया जाएगा।
‘गैर-जरूरी टिप्पणियों का कोई अधिकार नहीं’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस को संबोधित करते हुए तुर्किए के राष्ट्रपति के बयान पर भारत का कड़ा रुख सामने रखा। उन्होंने कहा, “भारत, UN जनरल असेंबली में तुर्किए के राष्ट्रपति द्वारा भारत और केंद्र-शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बारे में की गई गैर-जरूरी टिप्पणियों को खारिज करता है।”
प्रवक्ता ने आगे स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा मामला है। ऐसे संवेदनशील और आंतरिक मुद्दों पर किसी बाहरी पक्ष का हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार या भूमिका नहीं बनती है।
UNGA में एर्दोगन ने क्या कहा था?
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान 24 सितंबर को अपने संबोधन में रेसेप तैयप एर्दोगन ने एक बार फिर कश्मीर का जिक्र किया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में एर्दोगन ने कहा था कि दक्षिण एशिया में यह जरूरी है कि कश्मीर मुद्दे समेत सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए सुलझाया जाए।
तुर्किए के राष्ट्रपति इससे पहले भी कई बार संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दा उठाने के लिए कर चुके हैं। वहीं, भारत लगातार और दृढ़ता से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह साफ करता रहा है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या दखलअंदाजी की कोई गुंजाइश नहीं है।

