सत्ता की ‘कुंजी’ हरिद्वार-11 सीटों का सियासी गणित, जानें हर सीट का समीकरण

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दीपक श्रीवास्तव

उत्तराखंड की राजनीति में हरिद्वार सिर्फ मां गंगा के पावन तटों, कुंभ नगरी और धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला पूरे प्रदेश की सत्ता की सबसे बड़ी चाबी माना जाता है। पहाड़ी जिलों से अलग मैदानी और ग्रामीण ताने-बाने में बुना हरिद्वार राज्य का सबसे बड़ा वोट बैंक वाला क्षेत्र है। सिडकुल और बीएचईएल (BHEL) जैसे औद्योगिक हब, रुड़की जैसा प्रमुख शिक्षण व सैन्य केंद्र और तराई-खादर की विस्तृत कृषि बेल्ट इस जिले को राजनीतिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली बनाते हैं।

2027 के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जिले की सभी 11 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दलों की हलचल तेज हो चुकी है। राज्य के अन्य हिस्सों में जहां मुख्य मुकाबला सीधे तौर पर भाजपा (BJP) और कांग्रेस (INC) के बीच रहता है, वहीं हरिद्वार में बहुजन समाज पार्टी (BSP) और निर्दलीय ताकतें भी मजबूत जनाधार के साथ अक्सर मुकाबले को बहुकोणीय बनाती रही हैं।

हरिद्वार जिला: जनसांख्यिकी और धार्मिक ताना-बाना

जिले की सामाजिक और धार्मिक संरचना चुनावी दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील और निर्णायक है:

  • जनसंख्या और साक्षरता: जिले की कुल आबादी 18,90,422 है, जिसमें 10,05,295 पुरुष और 8,85,127 महिलाएं शामिल हैं। जिले की कुल साक्षरता दर 74.62 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता 81.00 प्रतिशत और महिला साक्षरता दर 64.00 प्रतिशत दर्ज है।

  • धार्मिक संरचना: जिले में हिंदू आबादी 64.27 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 34.28 प्रतिशत है। इसके अलावा सिख समुदाय की हिस्सेदारी 0.92 प्रतिशत और ईसाई आबादी 0.26 प्रतिशत है।

चुनावी समर के प्रमुख स्थानीय मुद्दे

हरिद्वार के चुनावी मैदान में धार्मिक अस्मिता के साथ-साथ किसानों और औद्योगिक श्रमिकों के जमीनी मुद्दे हावी रहते हैं:

  • गन्ना भुगतान और किसान राजनीति: खादर-तराई की बेल्ट में किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान और कृषि लागत का सवाल हमेशा बड़ा मुद्दा रहता है।

  • बाढ़, जलभराव और ड्रेनेज: बरसात के दिनों में लक्सर, खानपुर और ग्रामीण इलाकों में गंगा और बरसाती नदियों से होने वाला जलभराव व फसल बर्बादी।

  • औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय रोजगार: सिडकुल और BHEL जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं के लिए तय आरक्षण और रोजगार के अवसर।

  • तीर्थ पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर: धार्मिक पर्यटन के बुनियादी ढांचे का विकास, घाटों का प्रबंधन और शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम से निजात।

हरिद्वार की 11 विधानसभा सीटों का 2022 का चुनावी गणित

2022 के विधानसभा चुनाव में जिले का जनादेश किसी एक दल के पक्ष में नहीं गया था। 11 सीटों में से कांग्रेस ने 5, भाजपा ने 3, बसपा ने 2 और एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी।

1. हरिद्वार (Haridwar) धार्मिक पर्यटन, आश्रमों और गंगा घाटों का केंद्र मानी जाने वाली यह सीट भाजपा का अभेद्य गढ़ रही है। 2022 में भाजपा के वरिष्ठ नेता मदन कौशिक ने 53,147 वोट हासिल कर कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी (37,910 वोट) को 15,237 मतों से हराया।

2. हरिद्वार ग्रामीण (Haridwar Rural) ग्रामीण परिवेश वाली इस बहुचर्चित सीट पर 2022 में कांग्रेस की अनुपमा रावत ने 50,028 वोट पाकर तत्कालीन कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद (45,556 वोट) को 4,472 मतों से शिकस्त दी थी।

3. बीएचईएल रानीपुर (BHEL Ranipur) औद्योगिक और शहरी कर्मचारियों के प्रभुत्व वाली इस सीट पर भाजपा के आदेश चौहान ने जीत की हैट्रिक लगाई। उन्होंने 57,544 वोट हासिल कर कांग्रेस के राजवीर सिंह चौहान (43,682 वोट) को 13,862 वोटों के अंतर से पराजित किया।

4. ज्वालापुर – SC (Jwalapur) अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर दलित और मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी संख्या है। 2022 में कांग्रेस के रवि बहादुर ने 42,372 वोट हासिल कर भाजपा के मौजूदा विधायक सुरेश राठौड़ (29,029 वोट) को 13,343 मतों से मात दी।

5. भगवानपुर – SC (Bhagwanpur) उत्तर प्रदेश की सीमा से सटी इस आरक्षित सीट पर दिवंगत सुरेंद्र राकेश के परिवार का असर रहा है। 2022 में कांग्रेस की ममता राकेश ने 44,808 वोट पाकर बसपा के सुबोध राकेश (39,997 वोट) को कड़े मुकाबले में 4,811 वोटों से हराया।

6. झबरेड़ा – SC (Jhabrera) कृषि और ग्रामीण परिवेश वाली इस आरक्षित सीट पर कांग्रेस के वीरेंद्र कुमार ने 39,652 वोट प्राप्त किए और भाजपा के राजपाल सिंह (31,436 वोट) को 8,216 मतों के अंतर से पराजित किया।

7. पिरान कलियर (Pirankaliyar) ऐतिहासिक दरगाह के लिए प्रसिद्ध इस सीट पर मुस्लिम और दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2022 में कांग्रेस के फुरकान अहमद ने 43,539 वोट पाकर भाजपा के मुनीश कुमार सैनी (27,796 वोट) को 15,743 वोटों से मात देकर अपना कब्जा बरकरार रखा।

8. रुड़की (Roorkee) आईआईटी रुड़की और व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचानी जाने वाली इस शहरी सीट पर बेहद करीबी मुकाबला देखा गया था। भाजपा के प्रदीप बत्रा ने 36,986 वोट जुटाकर कांग्रेस के यशपाल राणा (34,709 वोट) को महज 2,277 मतों से हराया था।

9. खानपुर (Khanpur) यह सीट अपनी आक्रामक राजनीति और किसान आंदोलनों के लिए जानी जाती है। 2022 में यहां निर्दलीय उम्मीदवार उमेश कुमार ने 38,767 वोट पाकर बड़े सियासी दलों को चौंकाया और बसपा के रवींद्र सिंह (31,915 वोट) को 6,852 मतों से हराया।

10. मंगलौर (Manglaur) पारंपरिक रूप से बसपा और कांग्रेस की सीधी लड़ाई वाली इस सीट पर 2022 में जिले का सबसे नजदीकी मुकाबला हुआ था। बसपा के दिवंगत सरवत करीम अंसारी ने 32,660 वोट हासिल कर कांग्रेस के काजी मोहम्मद निजामुद्दीन (32,062 वोट) को महज 598 मतों के मामूली अंतर से पराजित किया था।

11. लक्सर (Laksar) गन्ना किसानों की प्रमुख बेल्ट और जलभराव की समस्या से जूझने वाले लक्सर क्षेत्र में बसपा के कद्दावर नेता मोहम्मद शहजाद ने 34,899 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। उन्होंने भाजपा के संजय गुप्ता (24,459 वोट) को 10,440 मतों से हराया था।

2027 के चुनाव में हरिद्वार का यह मिला-जुला राजनीतिक मिजाज सभी दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा, जहां सत्ता तक पहुंचने के लिए किसानों, औद्योगिक कामगारों, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के जटिल गठजोड़ को साधना अनिवार्य रहेगा।