गाजियाबाद में BJP क्यों मजबूत हुई? कांग्रेस के गढ़ से समझें सियासी समीकरण

देश की राजधानी नई दिल्ली से सटी उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद विधानसभा सीट (सीट संख्या–56) को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मजबूत गढ़ माना जाता है। पिछले तीन चुनावों—2017, 2022 और 2024 के उपचुनाव—में भाजपा ने यहां भारी मतों के अंतर से एकतरफा जीत दर्ज की है। हालांकि, इस सीट का सियासी इतिहास हमेशा से ऐसा नहीं था। एक दौर में यह सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट मानी जाती थी, लेकिन राम मंदिर आंदोलन के बाद से यहां की चुनावी दिशा पूरी तरह बदल गई।
कांग्रेस के दौर से भाजपा के वर्चस्व तक का सफर
1980 के दशक में गाजियाबाद विधानसभा सीट पर कांग्रेस का एकछत्र राज था। पार्टी ने साल 1980, 1985 और 1989 के विधानसभा चुनावों में लगातार तीन बार जीत दर्ज की। 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के उभार के साथ ही यहां भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ा। साल 1991 से 2022 के बीच उत्तर प्रदेश में हुए आठ विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अकेले छह बार इस सीट पर परचम लहराया है।
इस बीच, साल 2002 में कांग्रेस के सुरेंद्र गोयल ने जीत हासिल की थी, जबकि 2004 के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की साइकिल चली और सुरेंद्र कुमार मुन्नी विधायक बने। वहीं, 2012 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सुरेश बंसल ने भाजपा के अतुल गर्ग को हराकर जीत दर्ज की थी। इसके बाद से यह सीट पूरी तरह भाजपा के पाले में आ गई।
पिछले तीन चुनावों के नतीजे और आंकड़े
1. गाजियाबाद विधानसभा उपचुनाव परिणाम (2024)
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा विधायक अतुल गर्ग सांसद चुने गए, जिसके चलते यह सीट खाली हुई। इसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा के संजीव शर्मा ने सपा प्रत्याशी सिंहराज जाटव को 69 हजार से अधिक वोटों के विशाल अंतर से हराया। इस चुनाव में सपा को कांग्रेस का भी समर्थन प्राप्त था।
| प्रत्याशी | पार्टी | प्राप्त वोट |
| संजीव शर्मा (विजेता) | भारतीय जनता पार्टी | 96,850 |
| सिंहराज जाटव | समाजवादी पार्टी | 27,174 |
| पीएन गर्ग | बहुजन समाज पार्टी | 10,729 |
2. गाजियाबाद विधानसभा चुनाव परिणाम (2022)
साल 2022 के चुनाव में भाजपा के अतुल गर्ग ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की। उन्होंने सपा के विशाल वर्मा को 1,05,537 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी।
| प्रत्याशी | पार्टी | प्राप्त वोट |
| अतुल गर्ग (विजेता) | भारतीय जनता पार्टी | 1,50,205 |
| विशाल वर्मा | समाजवादी पार्टी | 44,668 |
| केके शुक्ला | बहुजन समाज पार्टी | 32,691 |
| सुशांत गोयल | कांग्रेस | 11,818 |
3. गाजियाबाद विधानसभा चुनाव परिणाम (2017)
2017 के विधानसभा चुनाव में अतुल गर्ग ने पहली बार जीत दर्ज की। उन्होंने बसपा के तत्कालीन विधायक सुरेश बंसल को 70 हजार से ज्यादा मतों से हराकर 2012 की हार का बदला लिया।
| प्रत्याशी | पार्टी | प्राप्त वोट |
| अतुल गर्ग (विजेता) | भारतीय जनता पार्टी | 1,24,201 |
| सुरेश बंसल | बहुजन समाज पार्टी | 53,696 |
| केके शर्मा | कांग्रेस | 39,648 |
गाजियाबाद सीट का सामाजिक और जातीय समीकरण
गाजियाबाद विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह से शहरी और अर्ध-शहरी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां अलग-अलग वर्गों की आबादी चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है:
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दलित मतदाता: क्षेत्र में सबसे बड़ा वोट बैंक दलित समुदाय का है, जिनकी संख्या करीब 75,000 आंकी जाती है।
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ब्राह्मण, वैश्य और मुस्लिम मतदाता: इन तीनों वर्गों का राजनीतिक प्रभाव काफी मजबूत है। स्थानीय अनुमानों के अनुसार, प्रत्येक वर्ग की आबादी लगभग 60,000 से 70,000 के बीच है।
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पंजाबी समुदाय: व्यापारिक और शहरी प्रभाव रखने वाले पंजाबी वोटरों की संख्या करीब 50,000 के आसपास मानी जाती है।
सामाजिक संतुलन और मजबूत संगठन के बूते भाजपा इस सीट पर लगातार अपनी बढ़त बनाए हुए है, जबकि विपक्षी दल सपा, बसपा और कांग्रेस अपने खोए जनाधार को दोबारा जुटाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
