एशियन गेम्स में ईशा ने फिर रचा इतिहास, 25m पिस्टल में भारत को सिल्वर

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

भारतीय निशानेबाज ईशा सिंह ने महिलाओं की 25 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। फाइनल मुकाबला बेहद उतार-चढ़ाव और रोमांच से भरा रहा। ईशा ने कमाल की शूटिंग का मुजाहिरा किया; वह पहले चौथे स्थान पर रहकर बाहर होने से बचीं, फिर सिल्वर मेडल पक्का करने के लिए शूट-ऑफ़ के दबाव से सफलतापूर्वक गुज़रीं।

गोल्ड मेडल के लिए उनका मुकाबला चीन की शियाओ से हुआ, जो टाई-ब्रेकर तक खिंचा। आखिर में शियाओ ने आखिरी शॉट के साथ गोल्ड पर निशाना साधा और ईशा को सिल्वर से संतोष करना पड़ा। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही ईशा ने एशियन गेम्स के रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली है।

कौन हैं ईशा सिंह?

ईशा सिंह भारत की बेहतरीन पिस्टल शूटर्स में गिनी जाती हैं। 1 जनवरी 2005 को जन्मीं ईशा मूल रूप से तेलंगाना के हैदराबाद की रहने वाली हैं। वह 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल इवेंट्स में देश का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके नाम एशियन गेम्स, ISSF वर्ल्ड कप और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर मेडल दर्ज हैं।

कई खेलों को आजमाने के बाद शूटिंग में मिला जुनून

ईशा का शूटिंग तक का सफर काफी दिलचस्प रहा है। इस खेल में आने से पहले उन्होंने बैडमिंटन, टेनिस, स्केटिंग और गो-कार्टिंग जैसे कई खेलों में हाथ आजमाया, लेकिन कहीं भी उनका मन नहीं लगा। उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट तब आया, जब वह अपने पिता के साथ हैदराबाद के गाचीबोवली स्टेडियम स्थित एक शूटिंग रेंज में गईं। उस एक विजिट ने उनके भीतर शूटिंग का जुनून पैदा कर दिया।

पिता ने घर में ही बना दी थी शूटिंग रेंज

ईशा की सफलता में उनके पिता सचिन सिंह की अहम भूमिका है, जो खुद एक पेशेवर रैली ड्राइवर हैं। बेटी की प्रतिभा को देखते हुए सचिन ने घर पर ही एक पेपर-टारगेट शूटिंग रेंज तैयार कर दी, ताकि ईशा की प्रैक्टिस में कोई रुकावट न आए। सीमित सुविधाओं में जी-तोड़ मेहनत करने के बाद ईशा ने पुणे में ओलंपिक मेडलिस्ट गगन नारंग की ‘गन फॉर ग्लोरी एकेडमी’ जॉइन की और अपने खेल को निखारा।

बीमारी में जीता मेडल, 13 की उम्र में किया बड़ा उलटफेर

साल 2017 में ईशा की मानसिक मजबूती का सबसे बड़ा इम्तिहान हुआ। एक महत्वपूर्ण टूर्नामेंट से पहले वह गंभीर रूप से बीमार थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और हिस्सा लेकर पोडियम फिनिश किया। ईशा इसे अपनी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट मानती हैं।

इसके बाद महज 13 साल की उम्र में ईशा ने पूरे भारतीय शूटिंग जगत को चौंका दिया। उन्होंने मनु भाकर और हीना सिद्धू जैसी दिग्गज स्टार्स को पछाड़कर सीनियर नेशनल टाइटल अपने नाम किया और इस इवेंट की सबसे कम उम्र की सीनियर नेशनल चैंपियन बनीं।

टोक्यो का मलाल, पेरिस में शानदार वापसी

भारत के कोर ट्रेनिंग ग्रुप का हिस्सा होने के बावजूद, ईशा टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने से बहुत मामूली अंतर से चूक गई थीं। इस निराशा ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया। उन्होंने वापसी करते हुए कई इंटरनेशनल मेडल अपने नाम किए और पेरिस ओलंपिक में भी भारत का गौरव बढ़ाया। आज उनका यह सिल्वर मेडल उनकी उसी जिद और हार न मानने वाले जज्बे का नतीजा है।