दिल्ली यूनिवर्सिटी क्यों कहलाती है राजनीति की नर्सरी? जानिए बड़े नाम

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) चुनाव के नतीजों की घोषणा के साथ ही विश्वविद्यालय को अपने चार नए छात्र नेता मिल गए हैं। छात्र राजनीति को मुख्यधारा की राजनीति की पहली सीढ़ी माना जाता है, और जब बात दिल्ली विश्वविद्यालय की हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। जिस तरह राष्ट्रीय राजनीति में कहा जाता है कि ‘दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है’, ठीक उसी तरह देश की सक्रिय राजनीति में कदम रखने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी को सबसे बड़ा और अहम पड़ाव माना जाता है।

यही वजह है कि दिल्ली विश्वविद्यालय को ‘भारतीय राजनीति की नर्सरी’ कहा जाता है, जहां से निकले छात्र नेताओं ने आगे चलकर विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया है।

क्यों ‘राजनीति की नर्सरी’ कहलाती है दिल्ली यूनिवर्सिटी?

देशभर के कई विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव होते हैं, लेकिन DUSU का मिजाज पूरी तरह अलग है। इसका मुख्य कारण राष्ट्रीय राजनीतिक दलों की इसमें सीधी दिलचस्पी है।

  • सीधा राजनीतिक मुकाबला: छात्र संघ चुनाव में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के बीच होता है।

  • राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर: दोनों ही बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां DUSU चुनावों पर पैनी नजर रखती हैं। यहां अपनी संगठनात्मक क्षमता और नेतृत्व कौशल साबित करने वाले युवा चेहरों को सीधे मुख्यधारा की पार्टियों में बड़ी जिम्मेदारियां दी जाती हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से निकले देश के बड़े सियासी चेहरे

DUSU की छात्र राजनीति ने देश को कई कद्दावर राजनेता दिए हैं, जिन्होंने भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाई:

  • अरुण जेटली: इस सूची में सबसे प्रमुख नाम पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली का है। उन्होंने 1974 में DUSU अध्यक्ष के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी और जेपी आंदोलन में भी अहम भूमिका निभाई।

  • विजय गोयल: 1977 में DUSU अध्यक्ष रहे विजय गोयल बाद में केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों के मंत्री बने।

  • अजय माकन: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने 1985 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली और बाद में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री तथा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने।

  • अलका लांबा: 1995 में DUSU अध्यक्ष चुनी गईं अलका लांबा ने बाद में दिल्ली विधानसभा में विधायक और महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पहचान बनाई।

  • रेखा गुप्ता: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की राजनीतिक शुरुआत भी डीयू से ही हुई। वह 1995 में DUSU की सचिव और 1996-97 में अध्यक्ष रह चुकी हैं।

  • अन्य प्रमुख चेहरे: इनके अलावा नूपुर शर्मा और रागिनी नायक जैसे कई मुखर और चर्चित प्रवक्ता भी दिल्ली यूनिवर्सिटी की ही देन हैं।

क्यों इतनी खास और चुनौतीपूर्ण है DU की छात्र राजनीति?

दिल्ली विश्वविद्यालय का स्वरूप ‘मिनी इंडिया’ जैसा है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और पूर्वोत्तर से लेकर पश्चिमी राज्यों तक के छात्र यहां शिक्षा हासिल करने आते हैं।

जब कोई छात्र DUSU का चुनाव लड़ता है, तो उसे देश के विभिन्न क्षेत्रीय, भाषाई और सामाजिक-जातिगत समीकरणों के बीच काम करने का अनुभव मिलता है। चुनावी जोड़-तोड़, संगठनात्मक रणनीति और संवाद की जो सीख छात्रों को इस परिसर में मिलती है, वह उन्हें भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति की पेचीदगियों और कूटनीति के लिए पहले से ही पूरी तरह तैयार कर देती है। यही वजह है कि DU से निकलने वाले नेता मुख्यधारा की राजनीति में बहुत तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना लेते हैं।