दिल्ली वोटर लिस्ट में 47.5 लाख नाम कटे, 15 दिन में सिर्फ 62,583 आवेदन

दिल्ली की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद जिन नागरिकों के नाम कट चुके हैं, उन्हें अपना नाम वापस जुड़वाने का अवसर दिया गया है। हालांकि, दावे और आपत्तियों के पहले 15 दिनों के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में करीब 47.5 लाख नाम हटाए गए थे, लेकिन 30 सितंबर तक चलने वाली विशेष प्रक्रिया के तहत 15 सितंबर तक महज 62,583 फॉर्म-6 (नया नाम जुड़वाने के लिए आवेदन) ही जमा हो सके हैं।
चुनाव कार्यालय ने अनुमान लगाया था कि हटाए गए नामों में से कम से कम 10 प्रतिशत यानी करीब 4.75 लाख लोग दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करेंगे। मौजूदा आंकड़ा इस अनुमान से काफी पीछे है। वहीं, ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने से पहले दिल्ली में 2.12 लाख फॉर्म-6 जमा हो चुके थे, जिसकी तुलना में 31 अगस्त के बाद आवेदन की गति काफी धीमी दर्ज की गई है।
जिलेवार आंकड़े: पश्चिमी दिल्ली आगे, नई दिल्ली में सबसे कम रुझान
राजधानी के विभिन्न जिलों से मिले फॉर्म-6 के आंकड़े दर्शाते हैं कि पश्चिमी दिल्ली के लोगों ने नाम जुड़वाने में सबसे ज्यादा तत्परता दिखाई है, जबकि नई दिल्ली जिले से सबसे कम आवेदन प्राप्त हुए हैं:
| जिला | जमा हुए फॉर्म-6 की संख्या |
| पश्चिमी दिल्ली | 7,834 |
| उत्तर-पश्चिम दिल्ली | 6,384 |
| पूर्वी दिल्ली | 6,297 |
| उत्तर-पूर्वी दिल्ली | 5,585 |
| दक्षिण-पश्चिम दिल्ली | 5,436 |
| बाहरी उत्तर दिल्ली | 4,287 |
| मध्य-उत्तर दिल्ली | 4,188 |
| मध्य दिल्ली | 2,647 |
| पुरानी दिल्ली क्षेत्र | 2,547 |
| नई दिल्ली | 1,203 |
33 लाख मतदाताओं को भेजे जा रहे नोटिस
एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया केवल उन 47.5 लाख हटाए गए नामों तक ही सीमित नहीं है। वर्तमान ड्राफ्ट सूची में शामिल कुल करीब 97 लाख मतदाताओं में से लगभग 33 लाख मतदाताओं को विवरण में विभिन्न विसंगतियों (Discrepancies) के संबंध में नोटिस भेजे जा रहे हैं। ड्राफ्ट सूची में मौजूद कुल मतदाताओं में से यह संख्या एक-तिहाई से भी अधिक है। इन नोटिसों के निस्तारण और दावों-आपत्तियों की समयसीमा पूरी होने के बाद अंतिम सूची का समीकरण बदल सकता है।
राजधानी की ‘फ्लोटिंग आबादी’ बनी बड़ी वजह
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में आवेदन कम आने की एक प्रमुख वजह यहां की अस्थायी आबादी (Floating Population) है। केंद्र व अन्य सरकारी सेवाओं के कर्मचारियों समेत बड़ी संख्या में लोग कुछ वर्ष दिल्ली में नौकरी करने के बाद अपने गृह राज्य या दूसरे शहरों में स्थानांतरित हो जाते हैं।
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भी करीब 47 लाख लोगों ने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए थे। अब 30 सितंबर तक चलने वाली इस दावे-आपत्ति प्रक्रिया के समापन के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितने वास्तविक मतदाता दोबारा मतदाता सूची में शामिल हो पाते हैं।
