HC विवाद: CJI बोले- मीडिया ट्रायल से नहीं, संस्थागत तरीके से होगा फैसला

नई दिल्ली: राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने न्यायपालिका में हलचल तेज कर दी है। इन आरोपों पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाया है। अपने जर्मनी और यूके के चार दिवसीय दौरे के दौरान बयान जारी करते हुए सीजेआई ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मौजूदा जज के खिलाफ शिकायतों का निपटारा केवल ‘संस्थागत तंत्र’ (Institutional Mechanism) के जरिए ही किया जाएगा, न कि मीडिया में चल रहे दावों के आधार पर।
‘आरोप लगना निष्कर्ष नहीं, मिलेगा अपना पक्ष रखने का मौका’
सीजेआई सूर्यकांत ने इस विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी जज पर केवल आरोप लग जाना ही उनके खिलाफ कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि जज को अपना पक्ष रखने और आरोपों का जवाब देने का पूरा और निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।
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सीजेआई ने कहा कि एक्टिंग चीफ जस्टिस के पद पर बने रहने, उनके तबादले या किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का निर्णय सभी तथ्यों और सबूतों को परखने के बाद सक्षम प्राधिकरण द्वारा ही लिया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट जजों से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों पर मीडिया में बहस या ट्रायल की अनुमति नहीं दे सकता।
कॉलेजियम कर रहा है चिट्ठियों की समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम फिलहाल विभिन्न हाईकोर्ट्स में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। सीजेआई ने बताया कि इसी कड़ी में जस्टिस संदीप मेहता द्वारा अपनी चिट्ठियों में उठाई गई चिंताओं का भी कॉलेजियम ने संज्ञान लिया है। उन्होंने साफ किया कि इन पत्रों के कंटेंट पर सार्वजनिक मंच पर बहस नहीं की जा सकती। हालांकि, जस्टिस मेहता द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों और जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के जवाब, दोनों की बहुत ही बारीकी और निष्पक्षता से समीक्षा की जा रही है।
क्या है पूरा विवाद और जस्टिस मेहता के आरोप?
यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा सीजेआई को लिखे गए तीन अलग-अलग पत्रों से शुरू हुआ है।
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जस्टिस मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं और ‘सेलेक्टिव केस लिस्टिंग’ (चुनिंदा केसों की सुनवाई) के जरिए पक्षपात करने के बड़े आरोप लगाए हैं।
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जस्टिस शर्मा अगले महीने रिटायर होने वाले हैं। जस्टिस मेहता का आरोप है कि अपने रिटायरमेंट से ठीक पहले वे प्रशासनिक अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं और रसूखदार पक्षकारों को फायदा पहुंचाने के लिए मामलों की लिस्टिंग में हेरफेर की जा रही है।
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इन्हीं आरोपों के आधार पर जस्टिस मेहता ने सीजेआई से मांग की थी कि राजस्थान हाईकोर्ट में तुरंत प्रभाव से किसी अन्य राज्य से नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की जाए।
