EPF की सैलरी सीमा ₹25 हजार हुई, 51 लाख कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

indian rupee
अजमल शाह
अजमल शाह

विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर केंद्र सरकार ने देशभर के कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के तहत सैलरी सीलिंग (वेतन सीमा) को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 सितंबर को इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।

51 लाख कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पीएफ कटौती के लिए नई सीमा 25,000 रुपये प्रतिमाह लागू होने से करीब 51 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा। यह वे कर्मचारी हैं जो 15,000 रुपये से 25,000 रुपये की सैलरी रेंज में आते हैं और अब सीधे तौर पर नए पीएफ नियमों के दायरे में शामिल हो जाएंगे। इस बदलाव के चलते भारत सरकार पर हर साल लगभग 11,339 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा।

2014 के बाद हुआ सीमा में बदलाव

वेतन सीमा बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इससे पहले पीएफ नियमों के तहत सैलरी सीमा में आखिरी बार सितंबर 2014 में बदलाव किया गया था, तब इसे 15,000 रुपये तय किया गया था। इस नए प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के बीच विस्तार से चर्चा हुई और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) ने अपनी बैठक में इसकी सिफारिश की थी। सरकार के अनुमान के मुताबिक, अगले पांच सालों में इस योजना पर करीब 56,696 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

वेतन सीमा बढ़ने से कर्मचारियों को मिलेंगे ये 3 बड़े फायदे

इस फैसले से लाखों कर्मचारियों को संगठित सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का दायरा मिलेगा। सैलरी सीलिंग बढ़ने से कर्मचारियों को मुख्य रूप से तीन लाभ सुनिश्चित होंगे:

  • EPF का लाभ: कर्मचारी भविष्य निधि के तहत उन्हें नियमित बचत का फायदा मिलेगा।

  • पेंशन की गारंटी: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के जरिये रिटायरमेंट के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी।

  • बीमा कवर: कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध होगी। इसके साथ ही पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान (Statutory contribution) की व्यवस्था भी मौजूदा वेतन स्तरों के अधिक अनुरूप हो जाएगी।

नियोक्ताओं और कार्यबल के लिए भी अहम कदम

सरकार का कहना है कि औपचारिक रोजगार केवल वेतन देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके साथ कर्मचारियों को एक सुनिश्चित सामाजिक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए। यह फैसला नियोक्ताओं (Employers) के लिए भी लाभकारी माना जा रहा है। व्यापक सामाजिक सुरक्षा मिलने से कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा होगा, जिससे कंपनियों को अपने प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने (Retention) में मदद मिलेगी और भविष्य के लिए एक स्थिर कार्यबल तैयार होगा।